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अब एमडीडीए में सॉफ्टवेयर करेगा नक्शा पास
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 01 Jul 2016 02:02 PM IST
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मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में अब इंजीनियर नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर नक्शों का परीक्षण करेगा। अगर बायलॉज के मुताबिक नक्शे में किसी भी तरह की गड़बड़ मिली तो सॉफ्टवेयर तुरंत उसकी जानकारी देगा। वहीं सब कुछ ठीक मिलने पर नक्शा तत्काल पास हो जाएगा। ऑटो कैड (आटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रूल्स) नामक यह सिस्टम लागू करने वाला एमडीडीए प्रदेश का पहला प्राधिकरण बन जाएगा।
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अभी एमडीडीए में नक्शा पास करने की ऑनलाइन व्यवस्था लागू है। इसके अनुसार नक्शा पास कराने के लिए किसी भी व्यक्ति को ऑनलाइन सिस्टम में अपना नक्शा अपलोड करना होता है। यहां इंजीनियर बायलॉज के अनुसार उसका परीक्षण करते हैं। नक्शा बायलॉज से इतर होने पर आपत्तियां लगाकर उसे वापस कर दिया जाता है। आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद दोबारा वहीं प्रक्रिया करनी होती है।
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एमडीडीए सचिव पीसी दुमका ने बताया कि आटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रूल्स सिस्टम लागू होने के सॉफ्टवेयर खुद ही बाद नक्शे का परीक्षण करेगा। नक्शे में बायलॉज से हटकर किसी भी तरह का निर्माण मिलने पर सॉफ्टवेयर तुरंत एसएमएस और ईमेल के जरिये इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति को देगा ताकि उसमें सुधार किया जा सके।
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उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) के संयुक्त मुख्य प्रशासक वंशीधर तिवारी ने बताया कि एमडीडीए में सिस्टम का ट्रायल चल रहा है। इसके बाद अन्य चार प्राधिकरण उड़ा, दून विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (साडा), हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और झील विकास प्राधिकरण नैनीताल में भी इसके लागू किया जाएगा।
क्या है ऑटो कैड सिस्टम
यह एक तरह का सॉफ्टवेयर है, जिसमें बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार सभी प्रावधान फीड कर दिए जाएंगे। जैसे ही कोई नक्शा इस सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा, सिस्टम उसका बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार परीक्षण करेगा। उदाहरण के लिए किसी मकान में सेट बैक बायलॉज से कम छोड़ा गया है या एफएआर ज्यादा है या सड़क की चौड़ाई कम है तो नक्शा पेंडिंग होने के साथ ही एसएमएस और मेल से इसकी सूचना मिल जाएगी।
समय बचेगा, मनमानी भी रुकेगी
ऑटोमैटिक सिस्टम लागू होने के बाद लोगों को नक्शे पास कराने या उनका स्टेटस जानने के लिए बार-बार चक्कर नहीं काटने होंगे। एमडीडीए में अभी पांच इंजीनियर नक्शों का परीक्षण करते हैं। एक नक्शे का परीक्षण करने में चार से छह घंटे का समय लगता है। उन्हें बायलॉज के मानकों के मुताबिक सभी बिंदुओं की जांच करनी होती है। इसमें कई बार मानवीय भूल भी हो जाती है। वहीं कई बार सब कुछ ठीक होने के बाद भी नक्शा रोक दिया जाता है या कुछ गड़बड़ियों के बावजूद पास कर दिया जाता है। कई बार दबाव में भी गलत नक्शे पास कर दिए जाते हैं। ऑटोमैटिक सिस्टम में इस पर रोक लग जाएगी।
आटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रूल्स लागू होने से लोगों को बहुत फायदा मिलेगा। फिलहाल एमडीडीए में ट्रायल पर व्यवस्था चल रही है। जल्द ही अन्य प्राधिकरणों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए