शादी की रिसेप्शन पार्टी में हर्ष फायरिंग के दौरान गोली लगने से समाजसेवी की मौत, अस्पताल में तोड़ा दम
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लामाचौड़ के पाडली नंबर एक गांव में शादी की रिसेप्शन पार्टी में हर्ष फायरिंग के दौरान गोली लगने से घायल समाजसेवी कौस्तुभ पडलिया की मौत हो गई है। उन्हें शुक्रवार रात सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में दूल्हे के पिता ने दो लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कराया है।
पाडली नंबर एक निवासी भास्कर पडलिया की दो दिन पहले शादी हुई थी। शुक्रवार की रात रिसेप्शन था। रात दस बजे के बाद रिसेप्शन के दौरान लोग डीजे पर डांस कर रहे थे। इस दौरान पाडली गांव के समाजसेवी कौस्तुभ पडलिया (30) पुत्र सुरेश चंद्र पडलिया को हर्ष फायरिंग में सीने में गोली लग गई थी। उन्हें रात में परिजनों ने सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था।
दूल्हे भास्कर पडलिया के पिता गोपाल चंद पडलिया ने शनिवार को तहरीर में बताया कि नवीन पडलिया अपनी दोनाली बंदूक लेकर आया था। इसमें मैगजीन फंसी हुई थी। नवीन और ललित पडलिया मैगजीन निकाल रहे थे। इसी दौरान गोली चल गई जो कौस्तुभ के सीने में जा लगी। मुखानी थाने के एसआई संजय बृजवाल ने बताया कि तहरीर के आधार पर नवीन और ललित पडलिया के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
नवीन पर बढे़गी आर्म्स एक्ट की धारा
लाइसेंसी दोनाली बंदूक रखने वाले नवीन की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। पुलिस आरोपी नवीन पर लाइसेंसी के दुरुपयोग में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी बढ़ाएगी। पुलिस आरोपी का दोनाली बंदूक का लाइसेंस भी निरस्त करने की संस्तुति करेगी। एसआई संजय बृजवाल ने बताया कि रोक के बावजूद लाइसेंसी बंदूक का दुरुपयोग किया गया है। इस कारण आर्म्स एक्ट की धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी। साथ ही लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति भी की जाएगी।
बेटा तुम्हारी शादी नहीं कर सका
समाजसेवी कौस्तुभ पडलिया की मौत से पूरा गांव शोक में डूबा है। जब उनकी अर्थी उठी तो वहां पर माहौल गमगीन हो गया। जब कौस्तुभ की अर्थी उठने लगी तो उनके पिता ने उसके गले में माला डाली। कहा कि बेटा मैं तुम्हारी शादी तो नहीं कर सका, इसी को अपनी शादी समझ लेना। इस भावुक और दुखद मौके पर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
कम उम्र में समाजसेवा क्षेत्र में कमाया नाम
कौस्तुभ पडलिया ने 30 वर्ष की उम्र में ही समाजसेवा के क्षेत्र में खूब नाम कमाया था। वह कई संस्थाओं से जुडे़ रहे। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। गरीब और असहाय मरीजों के इलाज, ब्लड डोनेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रहती थी।