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बैंक खातों में जमा समाज कल्याण की योजनाओं का करोड़ों रुपया, पात्रों को नहीं मिला लाभ
Thu, 17 Jan 2019 09:55 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 17 Jan 2019 09:55 AM IST
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छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर विवादों में फंसे समाज कल्याण विभाग ने योजनाओं का करोड़ों रुपया बैंकों में जमा रखा, जिससे गरीब और मजबूर पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य लाभों से वंचित रह गए। ऑडिट विभाग ने कई गंभीर मामले पकड़े हैं।
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रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि कुछ जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने कल्याणकारी योजनाओं का करोड़ों रुपये इस्तेमाल करने के बजाय बैंकों में जमा रखा। इससे लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए। इतना ही नहीं चंपावत और अल्मोड़ा जिला समाज कल्याण अधिकारियों के कार्यालय में ऑडिट ने सात-सात ऐसे बैंक खाते पकड़े, जिन्हें संचालित करने की वित्त विभाग से मंजूरी तक नहीं ली गई।
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यह तथ्य भी उजागर हुआ कि लाखों रुपये की किसान पेंशन तो बांट दी गई, लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं लिया गया कि पेंशन लेने वाले किसान खेती कर भी रहे थे कि नहीं। विभाग इसके साक्ष्य देने में नाकाम रहा। ये मामला रुद्रप्रयाग जनपद के समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय का है। ऑडिट ने कुछ जिलों में पेंशन, छात्रवृत्ति व अन्य कल्याणकारी योजनाओं की धनराशि आनलाइन प्रक्रिया से सीधे पात्रों के खातों में भेजने के बजाय चेक के माध्यम से दिए जाने पर भी प्रश्न खड़े हुए हैं और इन्हें वित्तीय गड़बड़ी माना है। आठ माह पूर्व जारी इस रिपोर्ट का अभी विभाग अध्ययन ही कर रहा है।
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96.59 लाख की किसान पेंशन पर सवाल
रुद्रप्रयाग के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के ऑडिट में किसान पेंशन योजना में गड़बड़ी पकड़ी है। वर्ष 2016-17 के दौरान समाज कल्याण अधिकारी ने 96.59 लाख रुपये की किसान पेंशन का आवंटन किया, लेकिन ऑडिट टीम को विभाग यह साक्ष्य देने में नाकाम रहा कि किसान पेंशन के नाम पर जिन लोगों को धनराशि दी गई, वो खेती कर भी रहे हैं कि नहीं। इतना ही ऑडिट ने शासन से जारी 2.10 करोड़ रुपये का प्रयोग किए बगैर लौटाए जाने पर भी आपत्ति की है।
बैंक खातों में जमा रखा योजनाओं का रुपया
ऑडिट के दौरान यह गड़बड़ी भी उजागर हुई कि जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने पेंशन, छात्रवृत्ति व अन्य योजनाओं का करोड़ों रुपया बैंकों में जमा रखा। वर्ष 2014-15 के दौरान अल्मोड़ा में 15 करोड़ 59 लाख 85 हजार 713 करोड़ रुपये की धनराशि बगैर इस्तेमाल किए खातों में जमा रखी गई। 2016-17 में 4.53 करोड़ की राशि फिर खातों में अवरूद्ध कर दी गई। यही गड़बड़झाला रुद्रप्रयाग के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय ने किया, जहां बैंकों में 3.03 करोड़ रुपये की धनराशि चालू खातों में पार्क की गई। इसी तरह चमोली जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 11.24 करोड़, टिहरी में 14.75 करोड़ की राशि खातों में अवरूद्ध रखी गई। चंपावत में 4.86 करोड़ रुपये विभागीय खातों में जमा था। हरिद्वार जिले में भी 23.96 करोड़ की धनराशि का प्रयोग नहीं हुआ और ये बैंकों में पार्क कर दी गई। करोड़ों की धनराशि के बैंकों में जमा रखने से पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका।
अवैध ढंग से चल रहे थे बैंक खाते
ऑडिट ने जिला समाज कल्याण अधिकारी अल्मोड़ा के रोकड़ बही के दस्तावेज की जांच में यह पाया कि विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सात बैंक खातों का अनधिकृत रूप से संचालन हो रहा था। इन खातों को खोलने की वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली गई। ठीक ऐसी ही गड़बड़ी ऑडिट ने चंपावत के जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में पकड़ी, जहां वित्त विभाग की अनुमति के बगैर सात बैंक खातों का संचालन हो रहा था।
ऑनलाइन के बजाय चेक से कर दिया भुगतान
जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत धनराशि का भुगतान पात्रों को उनके खातों में ऑनलाइन करने के बजाय चेक के माध्यम से कर दिया। ऑडिट ने इसे अनियमितता माना है। मानकों के हिसाब से पेंशन, छात्रवृत्ति व अन्य योजनाओं की धनराशि ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये पात्रों के सीधे खातों में जमा की जानी चाहिए थी। ऊधमसिंह नगर जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय ने 353 लाभार्थियों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत 70.60 लाख बांटे जाने की पुष्टि तो की, लेकिन लाभार्थियों से चेक प्राप्ति की रसीदें प्रस्तुत नहीं कर पाया।
विजिलेंस ने एसआईटी को भेजी कई शिक्षण संस्थानों की जांच पत्रावली
विजिलेंस ने छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े हरिद्वार जिले के कई शिक्षण संस्थानाें की खुली जांच संबंधित पत्रावली एसआईटी को स्थानांतरित कर दी है। अब तक विजिलेंस शासन के आदेश पर इन कालेजों की जांच कर रही थी। हरिद्वार में मुकदमा दर्ज होने के बाद आला अफसरों के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। देहरादून और हरिद्वार में हुए छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित कई जांचें एक साथ प्रचलित थी। यह बात अलग है कि कोई भी जांच निर्णायक स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। अब एसआईटी से काफी उम्मीदें लगी है। शासन स्तर पर लंबे समय से यह घोटाला जांच में फंसा हुआ है। कई अधिकारियाें को जांच मिली, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी है। अब शासन स्तर से एसआईटी गठित होकर जांच चल रही है। इन सब के बीच विजिलेंस को भी अलग से खुली जांच के आदेश हुए। खुली जांच में हरिद्वार और रुड़की के कई शिक्षण संस्थान शामिल थे।
विजिलेंस ने जांच के दौरान छात्रवृत्ति से जुड़ी कई पत्रावली भी कब्जे में ली थी। इसी बीच एसआईटी ने जांच के बाद हरिद्वार से जुड़े छात्रवृत्ति घोटाले में मुकदमा दर्ज करा दिया। घोटाले का मुकदमा दर्ज होने के बाद विजिलेंस ने अधिकारियों से राय मशविरा किया। अधिकारियों के निर्देश पर छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़ी खुली जांच की पत्रावलियाें को एसआईटी को स्थानांतरित कर दिया गया, ताकि एसआईटी को जांच में मदद मिल सके। विजिलेंस अधिकारियों का कहना था कि खुली जांच में जिस तरह के तथ्य आए थे, उनसे एसआईटी को अवगत करा दिया गया है।