फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Small earthquakes occurring in Uttarkashi are a sign of some big danger Uttarakhand News in hindi

Uttarkashi Earthquake: छोटे-छोटे भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत, धरती के भीतर बढ़ती गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता

Sat, 01 Feb 2025 03:09 PM IST
रेनू सकलानी अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 01 Feb 2025 03:09 PM IST
सार

उत्तराखंड में 1991 में उत्तरकाशी में 6.6 तीव्रता के भूकंप के बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। हालांकि खरसाली में 2007 में भूकंप की तीव्रता 5 थी। ऐसे में वैज्ञानिक सेस्मिक गैप के तौर पर भी बड़े भूकंप की आशंका जता रहे हैं।

विज्ञापन
Small earthquakes occurring in Uttarkashi are a sign of some big danger Uttarakhand News in hindi
भूकंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तरकाशी में आ रहे छोटे-छोटे भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकते हैं। कई सालों से बड़ा भूकंप नहीं आने से हिमालय के भूगर्भ में ऊर्जा एकत्रित हो रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप तीव्रता की एक मात्रा बढ़ने के बाद धरती से निकलने वाली एनर्जी 30 गुना बढ़ जाती है, जबकि इसमें एक अंक तीव्रता और बढ़ा दी जाए तो यही एनर्जी 900 गुना हो जाती है।

विज्ञापन


ऐसे में छोटे भूकंप आने से बड़े भूकंप का खतरा टल जाने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। उत्तरकाशी में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुककर आ रहे भूकंप के झटके लोगाें में दहशत का कारण बन रहे हैं। लेकिन इन छोटे झटकों का संबंध किसी बड़े खतरे से है या नहीं, इस पर अब तक किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हालांकि वैज्ञानिक इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि उत्तराखंड में लंबे समय से बड़ा भूकंप नहीं आया है। ऐसे में छोटे भूकंप भी बड़े खतरे का संकेत हो सकते हैं।
विज्ञापन


आईआईटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि छोटे भूकंप से बड़े भूकंप के आने या न आने के बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि छोटे भूकंप से धरती के नीचे इकट्ठा एनर्जी बड़ी मात्रा में बाहर नहीं निकल पाती है। इस वजह से यह कहना भी मुश्किल है कि बड़े भूंकप नहीं आ सकते। उन्होंने बताया कि भूकंप का मैग्नीट्यूड का एक अंक बढ़ने से पहले के मुकाबले 30 गुना ज्यादा ऊर्जा बाहर निकलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

भूकंप की तीव्रता 6 से अधिक हो तो विनाश

जैसे-जैसे मैग्नीट्यूड का अंक बढ़ता जाता है, उसी अनुपात में धरती से निकलने की ऊर्जा की मात्रा बढ़ती जाती है। प्रो. सिंह का कहना है कि धरती के नीचे हो रही भूगर्भीय हलचल में भूकंप का आना तब तक एक सामान्य प्राकृतिक घटना की ही तरह है, जब तक कि उससे जानमाल की कोई हानि न हो। जब भूकंप की तीव्रता 6 से अधिक हो जाती है तो यह विनाश करने लगता है। वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड में 1991 में उत्तरकाशी में 6.6 तीव्रता के भूकंप के बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। हालांकि खरसाली में 2007 में भूकंप की तीव्रता 5 थी। ऐसे में वैज्ञानिक सेस्मिक गैप के तौर पर भी बड़े भूकंप की आशंका जता रहे हैं।

ये भी पढ़ें...Budget 2025-26:  मध्यम वर्ग को बड़ा तोहफा...नए टैक्स स्लैब का एलान होते ही खिले उत्तराखंड में लोगों के चेहरे

धरती के भीतर बढ़ती गतिविधियां चिंता का कारण

वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक डाॅ. नरेश कुमार का कहना है कि भले ही छोटे भूकंप का बड़े भूकंप से संबंध न हो लेकिन इस तरह छोटी गतिविधि भी चिंता का कारण है। ऐसे में आपदा पूर्व के कदम उठाए जाने जरूरी हैंं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में लंबे समय से बड़ा भूकंप नहीं आया है, जोन पांच में आने वाले हिमालयी राज्य में सेस्मिक गैप के कारण के भी सावधानी बरते जाने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed