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आस्था का महाधाम बनेगा सीता माता का भू-समाधि स्थल : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

Tue, 12 Nov 2019 08:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 12 Nov 2019 08:15 AM IST
सार

  • पौड़ी के कोट ब्लाक स्थित फलस्वाड़ी गांव में ली थी माता सीता ने भू-समाधि
  • भव्य मंदिर निर्माण को एक शिला, एक मुट्ठी मिट्टी व 11 रुपये दान में देने का किया आह्वान

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sita mata mandir in pauri uttarakhand
शरदोत्सव में मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सीता माता के भू-समाधि स्थल (फलस्वाड़ती गांव) को आस्था का नया महाधाम बनाया जाएगा। उन्होंने सीता माता के भव्य मंदिर निर्माण को एक शिला, एक मुट्ठी मिट्टी और 11 रुपये दान में देने का आह्वान किया। सीएम ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साधु-संतों व महात्माओं के साथ सीता सर्किट की जल्द ही पदयात्रा की जाएगी।

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सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ध्वजारोहण कर शरदोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के स्वरुप को सामूहिकता के साथ व्यापकता दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव अभी पौड़ी व आसपास के क्षेत्र का महोत्सव है।
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इसके पर्यटन, स्वरोजगार व प्रवासियों से जोड़कर व्यापक स्वरुप दिया जाना चाहिए। सीएम ने बच्चों को नशे से दूर रहने और शहरवासियों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग ना किए जाने का आह्वान किया। 
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सीता माता मंदिर को सीता सर्किट के रुप में विकसित करने की कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के कोट ब्लाक में फलस्वाड़ी गांव में स्थित सीता माता मंदिर को सीता सर्किट के रुप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। सर्किट में फलस्वाड़ी के सीता माता मंदिर, कोटसाड़ा के महर्षि वाल्मीकि मंदिर, देवल गांव स्थित श्री लक्ष्मण मंदिर समूह, विदाकोटी व देवप्रयाग स्थित श्री रघुनाथ मंदिर को जोड़ने की योजना है।

पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के माता सीता को त्यागने के बाद लक्ष्मण उन्हें विदाकोटी में छोड़ वापस अयोध्या लौट गए थे। कोटसाड़ा गांव स्थित महर्षि वाल्मीकि ने सीता माता को अपने आश्रम में रखा था।

सीता माता ने फलस्वाड़ी गांव में ली थी भू-समाधि

मान्यता है कि सीता माता ने फलस्वाड़ी गांव में भू-समाधि ली थी। सनातन समय से फलस्वाड़ी, कोटसाड़ा व देवल गांव के ग्रामीण फलस्वाड़ी में उनके भू-समाधि दिवस को मंसार मेले के रुप में मनाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम, रामायण व माता सीता में आस्था रखने वालों के लिए फलस्वाड़ी गांव सबसे बड़ा धाम है।

फलस्वाड़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। मंदिर के लिए उन्होंने श्रद्धालुओं से डेढ़ फुट लंबी व छह इंच चौड़ी शिला, अपने खेत की एक मुट्ठी मिट्टी और 11 रुपये दान में मांगे हैं, जो मंदिर की भव्यता व दिव्यता को अलौकिक रुप देने में अहम योगदान होगा। 

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