कहीं मैंने धोखे से साइन किए हैं तो मेरी भी होगी एसआईटी जांच: कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय
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शिक्षा विभाग में अमान्य एवं फर्जी प्रमाण-पत्र पर शिक्षकों की नियुक्ति मामले की एसआईटी जांच करा कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निर्णय लेने के लिए सुर्खियों में रहे कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय ने अब अपने ही विभाग पंचायती राज में वित्तीय अनियमितताओं की एसआईटी जांच का सख्त फैसला लिया है। उन्होंने यह तक एलान किया कि विभाग का दायित्व संभालने के बाद यदि किसी काम के लिए मुझसे भी धोखे से कोई गलती हुई है तो मैं भी जिम्मेदार हूं और जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं। एसआईटी की जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संकल्प लिया है। जिससे विभाग में किसी तरह की अनियमितता कतई बर्दाश्त नहीं होगी।
सवाल: आपने पंचायती राज विभाग की पहले सुध क्यों नहीं ली?
जवाब: जब से पंचायती राज विभाग मेरे पास आया जितना समय विभाग को देना चाहिए था, उतना नहीं दे पाया। लेकिन जैसे-जैसे पंचायतों का काम देखने, अनुभव और धरातल पर उतरने, फाइलों का निरीक्षण किया तो विभाग में कई तरह की कमियां पाई गई। इन कर्मियों को दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा हूं।
सवाल: विभाग में घोटालों के लिए कौन है दोषी। पंचायत प्रतिनिधि या अफसर ?
जवाब: पंचायती राज विभाग में वित्तीय अनियमितता के लिए किसी एक व्यक्ति जांच नहीं हो रही है। विभाग का मंत्री होने के नाते यदि किसी काम के लिए धोखे से मुझसे भी साइन हुआ है तो मैं भी जिम्मेदार हूं और इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है। मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव, निदेशक, सचिव भी जांच के दायरे में शामिल होंगे। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। एसआईटी जांच आदेश के साथ यह भी निर्देश किए हैं कि जब से मैं विभाग का मंत्री हूं, तब से आज तक पंचायतों को जो भी भुगतान हुआ है। इसकी खास तौर पर जांच होगी।
सवाल: ग्राम पंचायतों में घोटाला पकड़ने में इतने देरी क्यों?
जवाब: आज तक पंचायतों में पैसों को कैसे खर्च करना, खर्च करने का तरीका, बाजार भाव और किस रेट पर सामान की खरीद हो रही है, इन तमाम मामलों पर विभाग ने चिंता नहीं की है। जब मेरी जानकारी में मामला में आया है, तो मैंने स्वयं इसका मूल्यांकन किया। आठ हजार रुपये का सामान 22 हजार रुपये में खरीदा जा रहा है। ऐसा पूरे प्रदेश में हो रहा है। इस पर मैंने एसआईटी जांच कराने के आदेश दिए।
सवाल-पंचायतों के तहत मनरेगा के कार्यों में बड़े घपले हो रहे हैं, कार्रवाई क्यों नहीं?
जवाब: मनरेगा योजना के कार्यों का सोशल ऑडिट पर कार्रवाई हुई या नहीं, अभी इस पर कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन शिक्षा विभाग में एसआईटी जांच के बाद अब पंचायती राज विभाग में स्वयं ही एसआईटी जांच बैठा रहा हूं। ताकि सरकार व जनता के पैसे का दुरुपयोग न हो सके। यह विभाग में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी।