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कश्मीर में आतकंवादियों से लड़ते हुए शहीद हुआ देहरादून का लाल

Mon, 12 Jun 2017 07:09 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 12 Jun 2017 07:09 PM IST
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sipahi jeet bahadur singh thapa martyr in kashmir
फाइल फोटो

उत्तरी कश्मीर के एलओसी पर नौगांव सेक्टर में पाक प्रायोजित घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के दौरान घायल हुए दून के लाल नायक जीत बहादुर थापा ने रविवार शाम दिल्ली आरआर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को हरिद्वार में पूरे सैनिक सम्मान के साथ किया जाएगा। 

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नौगांव सेक्टर में घायल हुए 4/1 गोरखा राइफल्स के नायक एवं बंजारावाला देहरादून निवासी जीत बहादुर थापा की शहादत की सूचना रविवार शाम परिजनों को मिलते ही उनकी मां सावित्री देवी और पत्नी रानी थापा का रो रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और रविवार शाम से ही घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
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जीत बहादुर पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दो बड़े भाईयों में एक भाई हवलदार गुप्ता बहादुर थापा 6/8 जीआर श्रीनगर में तैनात हैं। जबकि एक अन्य बड़ा भाई मनबहादुर थापा जीआर से रिटायर्ड है। बहन पार्वती थापा का विवाह हो चुका है। उनके पिता स्वर्गीय नर बहादुर थापा भी पूर्व सैनिक थे।
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शहीद के जीजा विकास थापा के मुताबिक जीत बहादुर थापा की पढ़ाई डीएवी पीजी कालेज से हुई। उनकी एक पांच वर्षीय बेटी मानवी थापा एवं तीन महीने का बेटा रोनक थापा है।

तीन महीने बाद रिटायर्ड हो रहे थे जीत बहादुर

sipahi jeet bahadur singh thapa martyr in kashmir
शहीद जीत बहादुर थापा - फोटो : amarujala

शहीद नायक जीत बहादुर थापा तीन महीने बाद रिटायर्ड होने वाले थे। परिजनों में आस थी वह शीघ्र ही सेवानिवृत्त होकर घर लौटेेंगे, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। शहीद के जीजा विकास थापा के मुताबिक 31 सितंबर को वह सेवानिवृत्त हो रहे थे और एक अक्तूबर को उन्हें घर पहुंचना था। 

पांच भाई बहनों में सबसे छोटे होने से शहीद जीत बहादुर थापा मां सावित्री देवी के सबसे लाड़ले थे। मां का हाल ही में पथरी का आपरेशन हुआ है, जिसे अपने लाड़ले पुत्र का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है।

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