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प्रदूषण पर कैसे लगे अंकुश जब वैज्ञानिक, विशेषज्ञ ही नहीं
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देहरादून। एक तरफ केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) का पूरे देश में प्रदूषण स्तर नियंत्रित करने पर खासा जोर है। इसे लेकर केंद्र की ओर से तमाम योजनाएं भी संचालित हैं। वहीं उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की कमी के चलते प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को लागू कराने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं ।
उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी) के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो बोर्ड के पास महज 11 वैज्ञानिकों की टीम है। निर्धारित मानकों के मुताबिक 41 वैज्ञानिकों की जरूरत है। जहां तक तकनीकी विशेषज्ञों का सवाल है तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 26 तकनीकी विशेषज्ञों की जगह मात्र 10 तकनीकी विशेषज्ञ ही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति का अधियाचन सात माह पूर्व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा गया, लेकिन अभी यह मामला फिलहाल अधर में लटका हुआ है ।
बता दें, कैग ने भी अपनी सालाना रिपोर्ट में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को लेकर सवाल उठाए हैं। कैग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में राज्य में साल दर साल बढ़ते प्रदूषण को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कई बिंदुओं पर रिपोर्ट भी सौंपी गई है। कैग अधिकारियों ने जब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के समक्ष प्रदूषण कानूनों का अनुपालन नहीं सुनिश्चित कराने की बात उठायी तो अधिकारियों ने ज्यादातर मामलों में यह तर्क देकर बचाव किया कि उनके पास वैज्ञानिक व तकनीकी विशेषज्ञों की कमी है। इसके चलते प्रदूषण कानूनों को लागू कराने व प्रदूषण को नियंत्रित करने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती को लेकर अधियाचन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को सात माह पूर्व भेजा जा चुका है। अभी इस मामले में कोई प्रगति नहीं हो पाई है। बोर्ड में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। इसका असर प्रदूषण कानूनों को लागू कराने पर भी पड़ रहा है।
--एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी) के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो बोर्ड के पास महज 11 वैज्ञानिकों की टीम है। निर्धारित मानकों के मुताबिक 41 वैज्ञानिकों की जरूरत है। जहां तक तकनीकी विशेषज्ञों का सवाल है तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 26 तकनीकी विशेषज्ञों की जगह मात्र 10 तकनीकी विशेषज्ञ ही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति का अधियाचन सात माह पूर्व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा गया, लेकिन अभी यह मामला फिलहाल अधर में लटका हुआ है ।
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बता दें, कैग ने भी अपनी सालाना रिपोर्ट में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को लेकर सवाल उठाए हैं। कैग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में राज्य में साल दर साल बढ़ते प्रदूषण को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कई बिंदुओं पर रिपोर्ट भी सौंपी गई है। कैग अधिकारियों ने जब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के समक्ष प्रदूषण कानूनों का अनुपालन नहीं सुनिश्चित कराने की बात उठायी तो अधिकारियों ने ज्यादातर मामलों में यह तर्क देकर बचाव किया कि उनके पास वैज्ञानिक व तकनीकी विशेषज्ञों की कमी है। इसके चलते प्रदूषण कानूनों को लागू कराने व प्रदूषण को नियंत्रित करने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिकों व तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती को लेकर अधियाचन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को सात माह पूर्व भेजा जा चुका है। अभी इस मामले में कोई प्रगति नहीं हो पाई है। बोर्ड में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। इसका असर प्रदूषण कानूनों को लागू कराने पर भी पड़ रहा है।
--एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड