मेडिकल कॉलेज में हुई ऐसी रैगिंग कि वायरल हो गया मामला, तरीका जानकर सकते में आए अफसर
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मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामले की जांच कर रही एंटी रैगिंग कमेटी के सामने वरिष्ठों के खिड़की से मुर्गा बनने के आदेश देने की बात सामने आई है। यह मामला इन दिनों खूब चर्चा में है।
सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी ने बुधवार को एमबीबीएस प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग की। सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय और एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने मंगलवार को रैगिंग के मामले की जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पूछताछ में कुछ छात्रों ने बताया था कि वरिष्ठ खिड़की के बाहर से मुर्गा बनने का आदेश देते हैं। जिससे की वह पकड़ में न आ सकें। अधिकारियों ने एमबीबीएस प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं से कहा कि उत्पीड़न होने पर तत्काल जानकारी दें।
जानकारी देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा
अधिकारियों ने कहा कि जानकारी देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा। दोनों अधिकारियों ने अपने मोबाइल नंबर देने के साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का भी नंबर दिया।
यूजीसी में शिकायत करने वाला पीड़ित चाहे तो फोन कर आपबीती बता सकता है और उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा।
सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है, दो-तीन दिन बाद एक बार फिर एक-एक छात्र-छात्रा को बुलाकर बात की जाएगी। इस दौरान प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा, डॉ. एके सिंह, डॉ. आरजी नौटियाल, डॉ. अजय आर्या, डॉ. विनीता रावत, आलोक उप्रेती आदि थे।
ये निर्देश भी दिए
- एंटी रैगिंग स्कवायड गोपनीय तरीके से मामले की पड़ताल करे।
- प्रत्येक 15 दिन में ड्राप बाक्स भी एमबीबीएस के सभी सौ छात्र एक पत्र डालेंगे।
- शिकायत हो या न हो मगर पत्र डालना अनिवार्य होगा।
- सौ छात्र-छात्राओं की 25-25 की टीम बनेगी। प्रत्येक टीम पर मेडिकल कालेज प्रबंधन का एक कर्मी रहेगा तैनात।
- छात्र-छात्राओं से संवाद करने के साथ ही उनके परिजनों से भी करेगा बात और देगा रिपोर्ट।
- सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी ने छात्र-छात्राओं को दिए नंबर, कहा, फोन करें, गोपनीय रहेगा नाम।