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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Shivacharya Kedar Ling will be the 325th Rawal of Kedarnath Dham announcement will be made on Mahashivratri

Kedarnath: केदारनाथ के 325वें रावल होंगे 42 वर्षीय शिवाचार्य केदार लिंग, महाशिवरात्रि पर होगी विधिवत घोषणा

Sat, 14 Feb 2026 07:00 AM IST
अलका त्यागी विनोद नौटियाल, ऊखीमठ(रुद्रप्रयाग)
विनोद नौटियाल, ऊखीमठ(रुद्रप्रयाग) Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 14 Feb 2026 07:00 AM IST
सार

केदारनाथ के वर्तमान रावल 70 वर्षीय भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य कारणों से पद संभालने में असमर्थ  जताई है। इसलिए उन्होंने अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है।

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Shivacharya Kedar Ling will be the 325th Rawal of Kedarnath Dham announcement will be made on Mahashivratri
केदारनाथ धाम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंच केदार में प्रमुख भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ धाम को महाशिवरात्रि को अपना 325वां रावल मिल जाएगा। वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद पर शिवाचार्य 42 वर्षीय शांतिलिंग (केदार लिंग) को अपना उत्तराधिकारी चुना है।

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महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित अपने मठ में केदारनाथ के वर्तमान रावल 70 वर्षीय भीमाशंकर लिंग ने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से अब केदारनाथ के रावल का पद संभालने में असमर्थ हैं। इसलिए वह अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हैं।
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रावल के इस लिखित बयान की विधिवत घोषणा 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के साथ ही की जाएगी। इस दौरान पंचगांई के डंगवाड़ी, भटवाड़ी, चुन्नी-मंगोली, किमाणा एवं पठाली डुंगर सेमला के हक-हकूकधारी एवं दस्तूरधारी ग्रामीण भी मौजूद रहेंगे।
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बीकेटीसी के वरिष्ठ पुजारी शिव शंकर लिंग और नांदेड़ पहुंचे पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट ने बताया कि रावल भीमाशंकर लिंग ने अपने मठ में आयोजित कार्यक्रम में केदारनाथ के नए रावल के रूप में केदार लिंग महाराज को अपना उत्तराधिकारी चुना है।

यह है परंपरा
केदारनाथ के रावल अविवाहित होते हैं। कर्नाटक के वीर शैव संप्रदाय से संबंध रखते हैं और शिव उपासक होते हैं। रावल परंपरानुसार केदारनाथ की पूजा के मुख्य कर्ताधर्ता होते हैं। रावल केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और कपाट बंद होने पर धाम में मौजूद रहते हैं।

भुकुंड लिंग थे पहले रावल
करीब चार सौ से अधिक वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत भुकुंड लिंग केदारनाथ के पहले रावल थे। वहीं भीमाशंकर लिंग 324वें रावल हैं।

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