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अंतिम समय तक कोर्ट में प्रार्थनापत्र देते रहे आरोपी, गुमराह करने को नहीं छोड़ी कोई कोर कसर

Tue, 04 Feb 2020 10:18 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Feb 2020 10:18 AM IST
सार

  • न्यायालय ने माना तथ्यहीन, सोमवार को भी कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत करने का दिया था प्रार्थनापत्र 

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Sexual assault in Boarding School case: Accused Submit Application Till Last time in court
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

देहरादून के बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म के प्रकरण में आरोपियों ने कोर्ट को गुमराह करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ट्रायल पूरा होने के बाद से लगातार आरोपियों ने प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किए। अंतिम दिन भी साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया, लेकिन कोर्ट ने इन सभी प्रार्थनापत्रों को आधारहीन बताया। 

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दरअसल, गत 15 जनवरी के बाद ही अदालत में इस मुकदमे का ट्रायल पूरा हो चुका था। इसके बाद भी आरोपियों की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया कि वे अपने बचाव में कुछ साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहते हैं। इसके लिए 28 जनवरी की तिथि नियत की गई। इस तिथि में भी बचाव पक्ष की ओर से कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुआ जिससे उनकी बेगुनाही साबित हो सके। 
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अब सोमवार के दिन दोष सिद्ध की घोषणा होने से पहले भी कुछ लोगों ने प्रार्थनापत्र अदालत में दाखिल कर दिया। फिर से यही दलील दी गई कि वे कुछ साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिससे उन पर लगाए गए सारे आरोप निराधार साबित हो जाएंगे, लेकिन अदालत ने इन सब दलीलों को खोखला माना।
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अदालत के अनुसार इस तरह के प्रार्थनापत्रों के चलते पहले ही फैसला काफी लेट हो चुका है, लिहाजा अब इसे आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। अदालत ने इन प्रार्थनापत्रों को औचित्यपूर्ण नहीं बताया और इन्हें खारिज करते हुए दोष सिद्धि की घोषणा कर दी। लंच के बाद सभी दोषियों को सजा का ऐलान किया गया। 

कब क्या हुआ

16 सितंबर 2018- अमर उजाला को सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने स्कूल में छापा मारा। 
17 सितंबर 2018- छात्रा के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 
18 सितंबर 2018- एक नाबालिग छात्र के बालिग होने का पता चला, वयस्क आरोपियों के साथ जेल भेजा गया। 
22 सितंबर 2018- प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ। 
23 सितंबर 2018- एसआईटी ने मौके पर जाकर सभी साक्ष्यों की पड़ताल की। 
24 सितंबर 2018- बोर्डिंग स्कूल के सभी हॉस्टल खाली हुए, परिजनों ने बच्चे निकाले। 
05 अक्तूबर 2018- पीड़िता के पिता का वॉयस सैंपल एफएसएल जांच के लिए भेजा गया। 
30 अक्तूबर 2018- पुलिस को छात्रा की क्लास टीचर व एक अन्य ने भी दिए बयान।  
15 नवंबर 2018- तीन नाबालिगों समेत सभी नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। 
15 जनवरी 2020- कोर्ट में ट्रायल पूरा हुआ। कुल 18 गवाहों की हुई गवाही। 

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