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उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में निर्माण के लिए एनओसी देने में गड़बड़ी, फाउंडेशन बना ही नहीं

Fri, 02 May 2025 02:56 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 02 May 2025 02:56 PM IST
सार

राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। वन्यजीवों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए निर्धारित पांच लाख की राशि भी अखाड़ा से वसूल नहीं की गई।

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Serious irregularities revealed in issuing NOC for construction in the area adjacent to Rajaji Tiger Reserve
राजाजी टाइगर रिजर्व (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। सबसे हैरतंगेज है कि जिस टाइगर रिजर्व फाउंडेशन में धनराशि जमा कराने की शर्त थी, वह फाउंडेशन वास्तव में बना ही नहीं था। इस मामले में राज्य सूचना आयोग के संज्ञान लेने पर वन क्षेत्र प्रशासन 13 साल बाद हरकत में आया है।

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फाउंडेशन का गठन करके आनन-फानन में पांच लाख की धनराशि जमा की गई है। अन्य शर्तों का पालन करने की बात भी कही जा रही है। आशंका है कि टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी इसी तरह से एनओसी जारी की गई।दरअसल, वन क्षेत्र के पास पंचायती अखाड़ा आश्रम को एनओसी देते समय कुछ शर्तें लगाई गई थीं। इनमें तेज रोशनी को जंगल की तरफ जाने से रोकना, राजाजी पार्क की तरफ ग्रीन बेल्ट विकसित करना और वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था के लिए धनराशि उपलब्ध कराना प्रमुख शर्त थी।
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पंचायती अखाड़ा ने नहीं किया शर्तों का पालन
राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने पाया कि पंचायती अखाड़ा ने शर्तों का पालन किए बिना हैरतंगेज तरीके से निर्माण कार्य किया। दूसरी ओर राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। वन्यजीवों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए निर्धारित पांच लाख की राशि भी अखाड़ा से वसूल नहीं की गई।
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आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव और नगर आयुक्त को पक्षकार बनाया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अनापत्ति आवासीय निर्माण के लिए दी गई, जबकि मौके पर व्यवसायिक निर्माण किया गया। मामले में गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए वन क्षेत्र के निदेशक से विस्तृत आख्या मांगी गई। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।


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पंचायती अखाड़ा ने आनन-फानन में पांच लाख का बैंक ड्राफ्ट राजाजी टाइगर कन्जरवेशन फाउंडेशन के बचत खाते में जमा कर दिया। इस रिपोर्ट के साथ निदेशक की ओर से पेश आख्या में यह भी बताया गया है कि एनओसी की अन्य शर्तों का भी पालन किया जा रहा है। आगामी वर्षा ऋतु में ग्रीन बेल्ट के लिए पेड़ भी लगा दिए जाएंगे। इस आधार पर आयोग ने अपील निस्तारित कर दी।

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