उत्तराखंड सीएम की कार पर हमले का दोषी है ड्राइवर?
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पिछले दिनों हलद्वानी में उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत की कार पर हमले के बाद एक नई कहानी सामने आ रही है। अब सवाल उठ रहा है कि कहीं हल्द्वानी में प्राइवेट इनोवा से सीएम को ले जाने वाला चालक अपराधी तो नहीं है। पुलिस अब उसका इतिहास खंगालने में जुट गई है।
उसका कब सत्यापन हुआ ये भी जानकारी मांग गई है। हैरानी की बात है कि पहले भी कई बार यही इनोवा और यही चालक सीएम हरीश रावत को हल्द्वानी में घुमा चुका है। लेकिन पुलिस को उस चालक के बारे में पूरी जानकारी तक नहीं है। सीएम पर हुए हमले के बाद अब पुलिस अधिकारियों को चालक का इतिहास खंगालने की याद आई।
अब जांच के नाम पर उसकी भी जांच की जा रही है। हमले की जांच में ये भी महत्वपूर्ण बिंदु है कि आखिर कैसे हमलावर सीएम के इतने करीब पहुंच गए। पुलिस ने क्यों उस वक्त एक्सेस कंट्रोल (वीआईपी के आसपास भीड़ रोकने) नहीं किया।
28 नवंबर को सीएम को लेकर हैलीपैड से शीशमहल एक प्राइवेट इनोवा से ले जाया गया, जिसे निजी चालक चला रहा था। वहां से उसी कार में सीएम को वापस हैलीपैड पर जाना था। इसी बीच शीशमहल में ही सीएम की कार पर हमला हुआ, जिसमें कार का एक शीशा टूटा और सीएम के साथ बैठे सिंचाई मंत्री यशपाल आर्या घायल हुए।
आखिर किसके कहने पर आए सीएम?
हमले की जांच में एडीजी अनिल रतूड़ी के साथ आए एएसपी प्रशासन धीरेंद्र गुंज्याल ने चालक के बारे में सारी जानकारी जुटाने को कहा है, साथ ही उसका इतिहास खंगालने के निर्देश हल्द्वानी पुलिस को दिए हैं। ये भी पता करना है कि उसका सत्यापन हुआ है या नहीं।
सीएम पर हमले की जांच में ये तथ्य भी शामिल किया जा रहा है कि आखिर बिना एडवांस सिक्योरिटी लाइजिन (एएसएल) के सीएम को सड़क मार्ग से एक निजी कार और निजी चालक लाया। जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया गया है कि आखिर सीएम की कार घटनास्थल पर इतनी देर क्यों रुकी, जबकि सीएम को सुरक्षा घेरे में कार तक पहुंचा दिया गया था और वे सुरक्षित कार में पहुंच भी गए थे। फिर कार देर तक चली क्यों नहीं। जांच में ये बिंदु भी अहम है कि आखिर क्यों घटना से पहले पुलिस एक्सेस कंट्रोल नहीं कर पाई।
सीएम के 28 नवंबर प्रशासन और खुफिया एजेंसियों ने पहले ही सीएम के न आने की बात कही थी। कहा गया था कि माहौल सीएम के अनुरूल नहीं है ऐसे में उनका आना दिक्कत कर सकता है। लेकिन इसके बावजूद किसके कहने पर सीएम हल्द्वानी आए ये बड़ा सवाल है। बताया जा रहा है कि एक मंत्री और एक बड़े अधिकारी ने सीएम को हल्द्वानी आने को कहा था। सीएम की विजिट से पहले भाजयुमो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए भी एक बड़े अधिकारी ने मना किया था।