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श्रीबद्रीनाथ धाम से लेकर फरक्का तक गंगा नदी के जल़ मिट्टी की गुणवत्ता की जांच में जुटे वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक

Tue, 07 Dec 2021 12:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 12:48 AM IST
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Scientists will find out how much Ganga has become free from pollution
देहरादून । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ स्वच्छ, निर्मल बनाने को लेकर लागू दर्जन भर योजनाओं के बाद नदी के जल व मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन किया जा रहा है। वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी विज्ञानियों की टीम श्रीबद्रीनाथ धाम से लेकर फरक्का तक विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय नदी गंगा के जल के नमूने और मिट्टी के नमूने के लेकर अध्ययन कर रही है।
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संस्थान के जलविज्ञानियों की टीम इस बात का पता लगा रही है कि आखिरकार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत पिछले एक दशक में लागू दर्जन योजनाओं को लागू करेन के साथ ही नदी को स्वच्छ व निर्मल बनाने को लेकर जो भी कदम उठाए गए उसका कितना असर नदी के जल और मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ा है। वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ जलविज्ञानी डॉ एसके राय की अगुवाई में वैज्ञानिकों की टीम श्रीबद्रीनाथ धाम, हरिद्वार, बिजनौर कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना समेत दर्जन स्थानों से गंगा नदी के जल और उसके आसपास की मिट्टी के नमूने लेकर तमाम पहलुओं का अध्ययन कर रही है। जलविज्ञानियों की टीम जल के नमूनों का अध्ययन कर इस बात का पता लगा रही है कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना लागू होने के बाद गंगा नदी के जल में भारी रासायनिक तत्वों के साथ ही विषैले तत्वों में कितनी कमी आयी है। नदी के जल व मिट्टी की गुणवत्ता पर इसका क्या असर पड़ा है? बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रीय नदी के जल के नमूनों को लेकर किसी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किया जा रहा है। इससे पहले राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की समेत देश के कई संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम समय-समय पर जल की गुणवत्ता का अध्ययन करती रही है।
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उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक 69 बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, 1527105 टॉयलेट्स का कराया जा रहा निर्माण
राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के साथ ही स्वच्छ निर्मल बनाया जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई थी। 20 हजार करोड़ की लागत वाली नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा परियोजना के तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जहां नदी के किनारे स्थित बड़े प्रमुख शहरों में 69 बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने की योजना थी। वहीं 58 बड़े घाटों का जीर्णोद्धार करने के साथ ही 254 शवदाहगृहों का निर्माण किया जाना था। इतना ही नहीं, रिवर सरफेस क्लीनिंग के साथ बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन को लेकर भी कई बड़े कार्यक्रम चलाए गए। इसके अलावा नदी के दोनों किनारों पर आसपास 134106 हेक्टेयर में वनीकरण शुरू कराया गया। गंगा के किनारों पर उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक 1527105 शौचालय का भी निर्माण कराए जाने की योजना थी।
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श्रीबद्रीनाथ धाम से लेकर फरक्का तक राष्ट्रीय नदी गंगा के किनारे स्थित कई शहरों से जल व मिट्टी के नमूने लेकर अध्ययन किया जा रहा है । अध्ययन में इस बात की जानकारी जताई जा रही है कि आखिरकार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत लागू की गई तमाम परियोजनाओं का नदी के जल व मिट्टी की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा है? अध्ययन में इस बात की जानकारी जताई जा रही है कि नदी पहले की तुलना में स्वच्छ व निर्मल हुई है या फिर पिछले एक दशक के भीतर नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है?
..... डॉ एसके राय, वरिष्ठ जलविज्ञानी, वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी
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