क्या आपको पता है मानसून की 'उम्र'? नहीं, तो पढ़ें
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वर्तमान मानसून की उम्र का राज वैज्ञानिकों ने खोल दिया है। और यह राज अरब महासागर में ग्लोबीजेरीना बोलाइडिस नामक सूक्ष्म जीव के जीवाश्म की जांच से पता चला है।
वर्तमान मानसून आज से एक करोड़ 30 लाख साल पहले अस्तित्व में आया। उसके पहले मानसून का ऐसा सिस्टम नहीं था। मानसून जिस स्वरूप में आज है, वह 70 लाख साल पुराना है। अरब महासागर में ग्लोबीजेरीना बोलाइडिस नामक जीव के जीवाश्म से यह पता चला है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला ‘हिमालय-कराकोरम-तिब्बत’ के दूसरे दिन यह शोध प्रस्तुत किया गया। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एके गुप्ता की अगुवाई में आईआईटी खड़गपुर के विज्ञानियों की टीम ने अरब महासागर के ओमान मार्जिन और ओवन रिज से समुद्र ‘ड्रिलिंग’ के माध्यम से जीवाश्म के सैंपल प्राप्त किए थे।
17 विज्ञानियों ने पेश किया ये शोध
डॉ. गुप्ता ने बताया कि जब समर मानसून की गति अधिक होती थी तो इन जीवाश्मों की संख्या बढ़ जाती थी। तेज हवाओं के कारण समुद्र का पानी अधिक हिलोरे भरता है। इससे समुद्र तल के पौष्टिक तत्व ऊपर आ जाते हैं। इसी से इन जीवों की संख्या बढ़ जाती रही।
उन्होंने बताया कि 70 लाख साल से मानसूनी हवाएं एक ही तरह के क्रम में बह रही हैं। शोध में बताया गया कि एक करोड़ 30 लाख साल पहले जलवायु परिवर्तन हुआ था जिससे मॉडर्न मानसून सिस्टम ने जन्म लिया।
इसके बाद इसमें धीरे-धीरे बदलाव से मानसून मौजूदा शक्ल में आ गया। इसके अलावा डॉ. नाटा वोगली, बीएस कोटलिया, जूलिया डी सिग्योर समेत 17 विज्ञानियों ने स्लाइड के माध्यम से समय-समय पर जलवायु परिवर्तन में होने वाले बदलाव के संबंध में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।