फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   School Education: Uttarakhand ranked 35th in India in Performance of Grading Index report

School Education: स्कूली शिक्षा में एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ उत्तराखंड, देशभर में मिला 35वां स्थान

Sat, 05 Nov 2022 07:30 AM IST
अलका त्यागी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 05 Nov 2022 07:30 AM IST
सार

मंत्रालय की ओर से जारी सूची में केरल, महाराष्ट्र और पंजाब 1000 अंकों के स्कोर में 928 अंक पाकर पहले, 927 अंकों के साथ चंडीगढ़ दूसरे और 903 अंकों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर है।

विज्ञापन
School Education: Uttarakhand ranked 35th in India in Performance of Grading Index report
उत्तराखंड में स्कूल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

राष्ट्रीय स्तर पर हुए सर्वेक्षण में उत्तराखंड एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2020-21 की रिपोर्ट जारी की गई। इस इंडेक्स में देशभर में उत्तराखंड को 35वां स्थान मिला है। उत्तराखंड को 1000 अंकों में से 719 अंक प्राप्त हुए हैं, जबकि हमसे पीछे केवल मेघालय और अरुणाचल प्रदेश ही हैं। 

विज्ञापन


मंत्रालय की ओर से जारी सूची में केरल, महाराष्ट्र और पंजाब 1000 अंकों के स्कोर में 928 अंक पाकर पहले, 927 अंकों के साथ चंडीगढ़ दूसरे और 903 अंकों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर है। जिला और राज्य स्तर पर स्कूली शिक्षा का आकलन करती यह रिपोर्ट बताती है कि बीते चार वर्षों में उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा का स्तर कभी भी ऊपर नहीं उठ पाया है।
विज्ञापन


Uttarakhand: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, नौकरियों में महिलाओं का क्षैतिज आरक्षण बरकरार
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्ष 2019-20 में 752 अंकों के बाद वर्ष 2020-21 में यह स्कोर 33 अंक लुढ़ककर 719 पर आ पहुंचा है। इससे पूर्व वर्ष 2017-18 में अंकों का यह स्कोर 704 और वर्ष 2018-19 में 712 पर था। खास बात यह की बीते वर्षों में 37 में से 27 राज्यों में सुधार हुआ, लेकिन खराब प्रदर्शन करने वाले 10 राज्यों में उत्तराखंड का नाम भी शामिल है। 

शिक्षा विभाग पहाड़ों मेें इंटरनेट की पहुंच नहीं होने का हवाला देकर अपना बचाव कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश में स्कूली शिक्षा की पोल पूरी तरह से खुल गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास बताने के लिए कुछ खास नहीं है। 


पीजीआई का उद्देश्य

परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) एक ऐसा सूचकांक है, जो स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलावों को उत्प्रेरित करने के लिए राज्यो, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन को एक समान पैमाने पर मापता है। पीजीआई का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा की स्थिति पर नजर रखने के साथ उन्हें उनके बेहतर प्रदर्शन करने और शिक्षा प्रणाली को हर स्तर पर मजबूत बनाने के लिए प्रेरित करता है।

70 मानकों पर परखी गई स्कूली शिक्षा

पीजीआई की यह रिपोर्ट 70 मानकों और पांच डोमेन वाली दो प्रमुख श्रेणियों के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए आंकड़े कई स्रोतों से इकट्ठा किए गए हैं। इस रिपोर्ट में 70 मानकों में कुल 1000 अंक शामिल हैं, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को आगे पांच डोमेन में विभाजित किया गया है। इनमें डोमेन-एक में लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी के लिए नौ मानकों में 180 अंक, डोमेन-2 में एक्सस के आठ मानकों में 80 अंक, डोमेन-3 में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के लिए 11 मानकों में 150 अंक, डोमेन-4 में इक्विटी के लिए 16 मानकों में 230 अंक। कुल 640 अंक रखे गए हैं। इसके अलावा दूसरी श्रेणी सुशासन और प्रबंधन में 26 मानकों में 360 अंकों को शामिल किया गया है। इसी श्रेणी में उत्तराखंड को सबसे कम अंक मिले हैं।


पीजीआई में बीते चार वर्षों में उत्तराखंड का प्रदर्शन

2017-18    18-19    19-20    20-21
 704            712        752       719

शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने इंटनेट के सिर फोड़ा ठीकरा 

पीजीआई रिपोर्ट में उत्तराखंड के खराब प्रदर्शन पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसका ठीकरा इंटरनेट के सिर फोड़ा है। उनके अनुसार प्रदेश में स्कूली शिक्षा में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट की अनुपलब्धता के चलते पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाई हैं। डॉ. रावत ने कहा कि सुशासन और प्रबंधन (गर्वनेंस एंड मैनेजमेंट) के मामले में इस रिपोर्ट में उत्तराखंड ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है। इसकी वजह पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत सी जगह इंटरनेट की पहुंच का न होना है। केंद्र सरकार का शिक्षा मंत्रालय सारा डाटा यू-डायस पोटर्ल से उठाता है। इस पोटर्ल पर सारी डिटेल स्कूल भरते हैं, जिसमें बच्चों की परफॉरमेंस से लेकर स्कूल में मौजूद बिजली-पानी और अन्य सुविधाओं की जानकारी भरनी होती है। इंटरनेट की कमी के चलते बहुत से स्कूल इन तमाम जानकारियों को नहीं भर पाए हैं। शिक्षा विभाग विद्या समीक्षा केंद्र ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर रहा है, जिसमें रियल टाइम डाटा भरा जाएगा, अगले छह माह में सारी जानकारियां इसमें भर दी जाएंगी। 

उत्तराखंड नौ नवंबर को 23वें राज्य स्थापना दिवस की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हमें आत्म-आलोचनात्मक और ईमानदारी से यह पूछना चाहिए की विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन के मामले में हम कहां खड़े हैं। स्कूली शिक्षा का गिरता स्तर शासन की कमी और सिस्टम के उदासीन रवैये का परिणाम है। उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा के पेशे में जुड़े सभी हितधारकों को इन खराब परिणामों पर गहराई से विचार करने और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए बदलाव करने के बारे में सोचना चाहिए।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष एसडीसी फाउंडेशन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed