छात्रवृत्ति घोटाला: गीताराम नौटियाल की गिरफ्तारी मामले में निर्णय सुरक्षित, 14 को अगली सुनवाई
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हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले के समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक आरोपी गीताराम नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। वहीं, कोर्ट ने घोटाले के खिलाफ दायर अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सचिव समाज कल्याण से पूछा कि अब तक उप निदेशक अनुराग शंखधर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए एसआईटी को अनुमति क्यों नहीं दी गई? कोर्ट ने इस प्रकरण पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तिथि नियत की है।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान एसआईटी देहरादून और हरिद्वार ने कोर्ट को बताया कि सरकार अनुराग शंखधर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति नहीं दे रही है। एसआईटी ने गीताराम नौटियाल के खिलाफ वारंट जारी किया है और देहरादून के 120 कॉलेजों में जांच चल रही है।
जांच में पाया गया कि इन कॉलेजों में भी घोटाला हुआ है। अन्य 11 जिलों के बारे में कोर्ट को अवगत कराया गया कि जांच चल रही है। कई अन्य संस्थानों में भी घोटाला हुआ है। संदिग्ध लोगों के खिलाफ एसआईटी ने एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन जांच में समाज कल्याण विभाग सहयोग नहीं कर रहा है।
वहीं हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी समाज कल्याण के संयुक्त निदेशक गीतराम नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। गीताराम नौटियाल ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व में ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने कारण इसे उच्च न्यायालय को रेफर कर दिया था। दोनों ही अदालतों ने गीताराम नौटियाल की याचिका पर सुनवाई के बाद उनकी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई थी। इसके बाद गीताराम नौटियाल ने एससी- एसटी आयोग में अपना उत्पीड़न होने का मामला दर्ज कराया और कहा कि एसआईटी पूछताछ के नाम पर उनका उत्पीड़न कर रही है। इसके बाद आयोग ने गीताराम नौटियाल पर कार्रवाई न करने के आदेश दिए थे।
यह है छात्रवृत्ति घोटाला
राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि समाज कल्याण विभाग की ओर 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है, जबकि 2017 में इसकी जांच के लिए पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा एसआईटी गठित की गई थी और तीन माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।