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समाज कल्याण छात्रवृत्ति घोटाला: हुई थी निलंबन की सिफारिश, मिला पदोन्नति का तोहफा

Sat, 12 Jan 2019 10:06 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Jan 2019 10:06 AM IST
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Scholarship scam officer promotion Conspiracy in uttarakhand
घोटाला - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड में समाज कल्याण के करोड़ों रुपयों के छात्रवृत्ति घोटाले को दफन करने का पक्का इंतजाम करने वाली पहली जांच समिति के सदस्य गीता राम नौटियाल को शासन ने शुक्रवार को पदोन्नति का तोहफा दिया है।

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समाज कल्याण विभाग में उपनिदेशक पद पर तैनात नौटियाल को संयुक्त निदेशक पद पर पदोन्नत किया गया है। इस पहली समिति ने घोटाले की शिकायत को निराधार करार देते हुए क्लीन चिट दी थी, इससे असहमत वरिष्ठ अधिकारियों ने तब समिति के सदस्यों को निलंबित करने और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। 
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 जानकारी के मुताबिक नौटियाल उस पहली जांच समिति के सदस्य थे, जिसे तत्कालीन निदेशक ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच सौंपी थी। उस वक्त घोटाले की रकम करीब सौ करोड़ के आस-पास बताई जा रही थी।

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समिति ने पांच दिन की जांच-पड़ताल के बाद निष्कर्ष दिया कि घोटाले की शिकायत आधारहीन है। इस तरह का कोई घोटाला अस्तित्व में नहीं है। तत्कालीन सचिव डॉ. भूपिंद्र कौर औलख ने जांच समिति की रिपोर्ट खारिज कर तत्कालीन अपर सचिव डॉ. वी.षणमुगम की अध्यक्षता में नई जांच समिति गठित की।

उस समिति की जांच में घोटाले की पुष्टि हुई। इस जांच समिति की रिपोर्ट पर तत्कालीन अपर सचिव मनोज चंद्रन ने घोटाले की सीबीआई या सतर्कता जांच के साथ ही घोटाले की शिकायत को निराधार मानने वाली समिति के सदस्यों को निलंबित करने और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।

शुक्रवार को नौटियाल का आदेश जारी होते ही कई लोगों ने सोशल मीडिया पर न केवल पदोन्नति पर सवाल खड़ा कर दिया, बल्कि निलंबन और विधिक कार्रवाई की पुरानी सिफारिशों की नोटशीट को अपलोड कर दिया।

इस बारे में नौटियाल का कहना है कि जांच के लिए उनके पास मात्र पांच दिन का समय था। उनकी जांच रिपोर्ट को तत्कालीन सचिव ने अस्वीकार कर नई समिति का गठन कर दिया था। समिति के सदस्यों के निलंबन की सिफारिश पर उनका कहना है कि नई जांच समिति बनने के बाद उस सिफारिश का कोई औचित्य नहीं था।

ये है घोटाले को क्लीन चिट समिति 
ये जांच समिति जनजाति कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक योगेंद्र रावत की अध्यक्षता में बनी। जिसमें समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक जीआर नौटियाल और जनजाति कल्याण के विशेष कार्याधिकारी संतोष कुमार शील शामिल थे।

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