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लूट: जहाज उड़ाने के प्रशिक्षण को दी 22 लाख की छात्रवृत्ति
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 14 Oct 2017 10:40 AM IST
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छात्रवृत्ति घोटाले के लिए सुर्खियों में रहे उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग में एक और अनोखा मामला सामने आया है।
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इस मामले में विभाग ने ऊधमसिंह नगर के एक छात्र को कामर्शियल पायलट के प्रशिक्षण के नाम पर 22 लाख रुपये की छात्रवृत्ति आवंटित कर दी। मामला तब खुला जब एक अन्य छात्र ने इसी तर्ज पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। अफसरों की मिलीभगत के चलते हुए इस गड़बड़झाले पर पर्दा डालने की कवायद शुरू हो गई है।
वर्ष 2010 में ऊधमसिंह नगर के छात्र उमेश कुमार ने देहरादून के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में कामर्शियल पायलट के प्रशिक्षण के नाम पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। दस्तावेजों में उमेश ने खुद को गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति परिवार से बताया। विभाग ने उसका आवेदन भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा।
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भारत सरकार से मंजूरी तो आ गई, मगर इस मंजूरी में धनराशि का उल्लेख नहीं किया गया। शासन स्तर से छात्रवृत्ति की स्वीकृति के लिए जो शासनादेश जारी हुआ, उसमें तीन चरणों में छात्रवृत्ति देने के निर्देश दिए गए।
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लेकिन, पड़ताल से यह पता चला कि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने महज पंद्रह दिन के भीतर सिर्फ दो किस्तों में ही कंपनी को छात्र की ट्रेनिंग शुल्क के एवज में करीब 22 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। जानकारी के अनुसार, उक्त निजी क्षेत्र की विमानन प्रशिक्षण कंपनी का मुख्यालय देहरादून के बसंत विहार में बताया गया है, जबकि प्रशिक्षण देने वाली उसकी शाखा पंतनगर में है।
यूं खुला मामला
यह खुलासा तब हुआ जब एक अन्य छात्र ने भी इसी तरह के प्रशिक्षण के लिए विभाग से 30 लाख रुपये की छात्रवृत्ति के लिए आवदेन किया। ये छात्र उड़ीसा के एक सरकारी संस्थान से इसी तरह के प्रशिक्षण के लिए छात्रवृत्ति चाहता था। जब विभागीय स्तर पर हीलाहवाली हुई तो उक्त छात्र ने उमेश कुमार को पूर्व में 22 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का हवाला दिया। इसके बाद विभागीय स्तर पर जब पड़ताल हुई तो पता चला कि एक छात्र को लाखों रुपये छात्रवृत्ति दे दी गई है।
मैं इस प्रकरण की जांच करवाऊंगा। ये देखा जाएगा कि छात्रवृत्ति का आवंटन मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। इसके अलावा विभाग क्या इतनी बड़ी राशि की छात्रवृत्ति का आवंटन कर सकता है। यदि नियम विरुद्ध छात्रवृत्ति दी गई होगी तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रणबीर सिंह, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण