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ऑडिट में खुलीं मनरेगा में जमीं घपलों की ऐसी परतें कि मच गया हड़कंप
भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:49 AM IST
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सोशल ऑडिट में कई चौंकाने वाले घपलों का खुलासा हुआ
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उत्तराखंड में पहली बार पंचायतों में कराए जा रहे ऑडिट से मनरेगा योजना में जमीं घपलों की परतें खुल रही हैं। नई टिहरी के जाखणीधार विकासखंड की दस पंचायतों में सोशल ऑडिट में कई चौंकाने वाले घपलों का खुलासा हुआ है।
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मनरेगा निर्माण कार्य में सीमेंट का गोलमाल किया गया। कार्य के माप रिकॉर्ड (मेजरमेंट बुक) और भुगतान बिलों की जांच करने पर सीमेंट बोरियों की संख्या में भिन्नता पाई गई। पंचायतों के मनरेगा रिकॉर्ड में फ्ल्यूड लगाकर बिलों में ओवर राइटिंग की गई।
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टिहरी गढ़वाल जनपद के जाखणीधार विकासखंड की दस पंचायतों में 18 से 24 सितंबर तक सोशल ऑडिट किया गया। इसमें मौली, बौंसटा, पालकोट, मिंगवाली, सोनधार, चौंण जसपुर, कफलना, पेटव पंचायतों में सोशल ऑडिट टीम ने मनरेगा के रिकॉर्ड की जांच करने पर कई अनियमितताएं पाई हैं। ऑडिट होने से पहले ही पंचायतों ने घपलों पर पर्दा डालने का प्रयास भी किया।
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मनरेगा के मस्ट्रोल व बिलों की रसीद पर फ्ल्यूड लगाकर ओवर राइटिंग कर छेड़छाड़ की गई। बिना अनुमति के काम शुरू कर भुगतान भी किया गया। भुगतान करने में बिलों पर न तो डिस्पेच नंबर अंकित है और न ही प्रधान के हस्ताक्षर व मुहर लगी है। मौली पंचायत में मनरेगा का काम ठेके पर कराने का मामला सामने आया है। ग्रामप्रधान, उपप्रधान व सदस्यों ने सोशल ऑडिट टीम को लिखित शिकायत दी कि मनरेगा काम ठेके पर एक शिक्षक को दिया गया। टीम के सामने ही इस पर पंचायत में खूब बवाल भी हुआ।
बौंसटा पंचायत में मनरेगा का 17570 रुपये भुगतान प्रधान के हस्ताक्षर व मोहर के बिना ही किया गया। एमबी बुक में कोई तारीख अंकित नहीं पाई गई। पेटव पंचायत में भी 9.80 लाख, कफलना पंचायत में 31 लाख, सोनधार पंचायत में 9.20 लाख के काम बिना वर्क ऑर्डर के मनरेगा काम मेमो पर ही जारी किए गए। चौंण जससुपर पंचायत में 95 हजार रुपये के भुगतान में प्रधान के हस्ताक्षर नहीं हैं।
मिंगवाली पंचायत में मनरेगा के कार्यों में सीमेंट का गोलमाल हुआ है। बिल में 30 बोरी सीमेंट दर्शाया गया। जबकि एमबी बुक में 22 बोरी ही सीमेंट का इस्तेमाल हुआ। इसी तरह सोनधार पंचायत में सीमेंट की बोरियों में अंतर पाया गया। बिल में 140 बोरी और एमबी बुक में 124 बोरी सीमेंट की दर्शाई गई।
पालकोट पंचायत के रिकॉर्ड में मनरेगा के तहत तालाब निर्माण को दिखाया गया। जबकि वास्तव में तालाब का निर्माण नहीं हुआ। इस कार्य के लिए 22918 रुपये का भुगतान किया गया।
टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार ब्लाक में 10 पंचायतों का मनरेगा सोशल ऑडिट किया गया। ऑडिट में पंचायतों के मनरेगा रिकॉर्ड में अनियमितता पाई गईं। जल्द ही सोशल ऑडिट की रिपोर्ट प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी जाएगी।
- रामविलास यादव, अपर सचिव ग्राम्य विकास विभाग