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बेटी को वकील बनाने के लिए मां बेच रही चूड़ियां
अजब सिंह/ अमर उजाला, पथरी (हरिद्वार)
Updated Mon, 13 Jan 2014 12:41 PM IST
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हरिद्वार के ग्राम घिस्सुपुरा के गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मी अकमल जहां जज बनकर महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कार्य करना चाहती है।
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इसी सपने के साथ वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रही है। आर्थिक तंगी के चलते बीच में पढ़ाई छूटने की नौबत भी आई, लेकिन मां ने चूड़ियां बेचकर बेटी की पढ़ाई जारी रखी।
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अकमल जहां के पिता निसार अहमद की 2007 में मौत हो गई थी। उस समय अकमल जहां ग्यारहवीं की छात्रा थी। घर का खर्च चलाना ही उसकी मां हाशमी बेगम के लिए मुश्किल हो गया था। ऐसे में बेटी की पढ़ाई का खर्चा उठाना मुश्किल था, लेकिन बेटी के सपनों को साकार करने के लिए उसने हार नहीं मानी।
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खर्च चलाने के लिए उसने घर के ही एक कोने में चूड़ी की दुकान खोल ली। चूड़ियां बेचकर पांच बच्चों का भरण पोषण किया और बेटी की पढ़ाई भी जारी रखवाई। आज अकमल जहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीए एलएलबी कर रही है।
पांच साल के कोर्स में यह उसका तीसरा साल है। आजकल छुट्टियों में अकमल जहां अपने पैतृक गांव आई हुई है।
गांव के स्कूल में प्राथमिक शिक्षा
अकमल जहां की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुई। इसके बाद फेरुपुर इंटर कॉलेज से 12 वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद जज बनने का लक्ष्य लेकर उसने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का रुख किया।
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पढ़ाई में बार-बार परेशानियां पैदा हुई। इसके बावजूद मां ने पढ़ाई का खर्च उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी तो मैंने भी हिम्मत नहीं हारी। गांव के कई लोग हमारी गरीबी को देखते हुए मां से कहते थे कि क्या लड़की को पढ़ाना जरूरी है। आज वह लोग भी हमारी हिम्मत और हौसला देखकर साहस बढ़ाते हैं।
- अकलम जहां