बिल्डर मौत मामला: पार्टनर के जाते ही अकेले पड़ गए थे साहनी, गूगल पर गुप्ता की कहानी पढ़ घबरा गए थे
शहर के बड़े बिल्डर सतेंद्र साहनी उर्फ बाबा साहनी ने शुक्रवार को पेसिफिक गोल्फ एस्टेट में अपनी बेटी के आठवीं मंजिल वाले फ्लैट से कूदकर आत्महत्या कर ली। साहनी के पास से दो पन्ने का सुसाइड नोट मिले थे।
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बिल्डर बाबा साहनी दोनों प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ही फंस गए थे। जब गुप्ता बंधु का नाम आया तो साथी ने समझाया। बात न मानने पर उसने साथ छोड़ दिया। इसके बाद गुप्ता जीजा-साले साहनी पर हावी हो गए और प्रोजेक्ट को अपने नाम कराने की धमकी देने लगे। कई दिन से साहनी परेशान थे और शुक्रवार को आत्मघाती कदम उठा लिया।
दरअसल, बाबा साहनी और उनके साथी संजय गर्ग का काम पहले ठीक चल रहा था। दोनों ने शहर के कई रिहायशी भवनों को ठेकेदारी पर बनाया था। इनमें से एक पेसिफिक गोल्फ एस्टेट भी था। करीब 32 साल के अपने अनुभव और काम के जरिये उनकी अलग पहचान बन गई थी।
85 प्रतिशत बजट के लिए हामी भरी
वह चाहते थे कि अपना कुछ अलग काम करें लेकिन बड़े प्रोजेक्ट के लिए उनके पास बजट नहीं था। उन्होंने दो प्रोजेक्ट बनाने का प्लान कर लिया था। बात बजट पर आई तो उन्होंने अपने परिचित से जिक्र किया। परिचित ने गुप्ता बंधुओं का नाम सुझाया। इनमें से एक अजय गुप्ता ने 85 प्रतिशत बजट के लिए हामी भर दी। प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया।
जनता के भी पैसे लग गए। लेकिन अब कुछ दिनों से गुप्ता इन दोनों प्रोजेक्ट को अपने नाम करने का दबाव बनाने लगे। धमकी देने लगे कि वो साहनी को बर्बाद कर देंगे। आरोपी कई दिनों से उन्हें सहारनपुर बुला रहे थे। उन्हें सहारनपुर में झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दे रहे थे। कुछ दिन पहले जब गुप्ता ने फोन किया तो कहा गया कि उनके बारे में गूगल पर पढ़ लें सारी कहानी समझ आ जाएगी। साहनी ने जब गुप्ता के बारे में दक्षिण अफ्रीका के कारनामे पढ़े तो वह घबरा गए। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने ये कदम उठा लिया।
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बेटी के फ्लैट का पासवर्ड जानते थे साहनी
साहनी की बेटी और उनके दामाद रेस कोर्स में उनके साथ रहते थे। पेसिफिक गोल्फ एस्टेट में उनकी बेटी का फ्लैट था। यह फ्लैट उन्होंने निर्माण के बाद उनके नाम किया था। शुक्रवार को जब वह वहां गए तो उन्हें पहले से ही वहां के लॉक का पासवर्ड पता था।