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विदेशी दवाओं की एंट्री पर RSS लगाएगा लगाम

Wed, 26 Nov 2014 02:54 AM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 26 Nov 2014 02:54 AM IST
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rss plan to protect uttarakhand herbal medicine.

देश में हर साल बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चार लाख करोड़ रुपये की दवाएं आयात की जाती हैं। इसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इसे बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उत्तराखंड की जड़-बूटियों और वन संपदा को सहेजने एवं प्रदेश में औषधि उद्यमिता विकसित करने की पहल शुरू की है। संघ लोगों के साथ मेडिकल छात्रों, विशेषज्ञों और दवा उद्यमियों को जागरूक कर रहा है।

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हरिद्वार में 28 नवंबर से शुरू होने वाले नव सृजन शिविर में इस मसले पर गहन चर्चा होगी। सरसंघ चालक मोहन भागवत स्वास्थ्य रक्षा और पर्यावरण रक्षा के मुद्दे पर तकनीकी शिक्षा और मेडिकल छात्रों को खासतौर पर संबोधित करेंगे।
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युवाओं को बताया जाएगा कि अगर जड़ी-बूटियों के गढ़ उत्तराखंड में वे उद्यम शुरू करेंगे तो देश की विदेशी मुद्रा का खर्च बचेगा। साथ ही सस्ती दवाएं मुहैया हो सकेंगी। संघ जड़ी-बूटी संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही निजी और सरकारी एजेंसियों को और मजबूती से काम करने की सलाह देगा।
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नव सृजन शिविर में स्वास्थ्य रक्षा का विशेष कार्यक्रम रखा गया है। इसमें दवाओं के अलावा दूसरी चिकित्सीय विधाओं पर भी चर्चा होगी। इसमें आयुर्वेद, योग, नाद योग, संगीत योग के विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

शिविर में योग गुरु स्वामी रामदेव, नाद योग विशेषज्ञ डॉ. नवदीप जोशी, संगीत योग विशेषज्ञ यश पाराशर छात्रों को अपनी विधाओं के संबंध में बताएंगे। बाद में संघ प्रमुख भागवत का वस्तुस्थिति पर संबोधन होगा।

इस प्लान पर काम करेगा संघ

rss plan to protect uttarakhand herbal medicine.

देश में हर साल चार लाख करोड़ रुपये की दवाएं आयात की जाती हैं। इससे राष्ट्रीय खर्च बढ़ता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां से सस्ते दामों पर जड़ी-बूटी ले जाती हैं और उनसे दवाएं बनाकर ऊंचे दामों निर्यात करती हैं। जड़ी-बूटियों का संरक्षण कर यहां उद्यम विकसित करने होंगे। उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों की अपार संपदा है। इसे सहेजा जाए और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए।
-डॉ. हरीश रौतेला, प्रांत प्रचारक उत्तराखंड

उत्तराखंड में एक से एक चमत्कारी जड़ी-बूटियां हैं। संजीवनी बूटी सरीखी औषधियों का अपार भंडार है। इन्हें सहेजा जाए और इस्तेमाल किया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ कीमती औषधियां तैयार होंगी। योग-प्राणायाम और दूसरी भारतीय विधाओं के प्रयोग करने से व्यक्ति वैसे ही रोगमुक्त रहेगा।
-कृपा शंकर, क्षेत्र प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ।

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