फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Roorkee: Drug department team caught fake Medicine Making factory, two people arrested

रुड़की: ड्रग विभाग की टीम ने पकड़ी नामी कंपनियों के नाम से नकली दवा बनाने की फैक्टरी, दो लोग गिरफ्तार

Sun, 23 Aug 2020 10:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 23 Aug 2020 10:11 PM IST
विज्ञापन
Roorkee: Drug department team caught fake Medicine Making factory, two people arrested
नकली दवा बनाने की फैक्टरी चलाने वाले गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

रुड़की के माधोपुर की फैक्टरी में नकली दवा बनाने के मामले में पुलिस ने मालिक समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस और ड्रग विभाग की टीम ने मौके से साढ़े चार लाख की नकदी और डेढ़ करोड़ की नकली दवाएं बरामद की हैं। इसके अलावा दवा बनाने वाली मशीन, पैकिंग मशीन और नामी कंपनियों के रैपर भी बरामद किए हैं। फैक्टरी को सील कर आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

विज्ञापन


सिविल लाइंस कोतवाली में रविवार को प्रेसवार्ता कर एसपी देहात एसके सिंह ने नकली दवा फैक्टरी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि माधोपुर में वीआर फार्मा के नाम से एक दवा फैक्टरी चल रही है। इसमें देश की नामी कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाई जा रही हैं। शनिवार रात पुलिस ने ड्रग विभाग की टीम को साथ लेकर फैक्टरी में छापा मारा। इस दौरान करीब डेढ़ करोड़ की कीमत की 200 पेटी नकली दवाएं बरामद हुईं। इसके अलावा साढ़े चार लाख की नगदी, दवा बनाने वाली और पैकिंग मशीन, नामी कंपनियों के रैपर व बॉक्स बरामद हुए।
विज्ञापन


इस दौरान फैक्टरी में प्रवीण त्यागी और कपिल त्यागी निवासी ग्राम इकड़ी, थाना सरधना जिला मेरठ मौजूद थे। प्रवीण त्यागी वर्तमान में रुड़की स्थित आर्य विहार कॉलोनी और कपिल भगवानपुर में रहता है। एसपी देहात ने बताया कि फैक्टरी का मालिक प्रवीण त्यागी है। लाइसेंस मांगने पर वह नहीं दिखा पाया। लिहाजा पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर फैक्टरी को सील कर दिया। एसपी देहात ने बताया कि रविवार को दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। इनके संपर्क में आने वाले लोगों की तलाश की जा रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बन रही थीं 200 नामी कंपनियों की दवाएं

फैक्टरी में बड़ी मात्रा में देश की कई नामी और बड़ी कंपनियों की दवाएं मिलीं। एसपी देहात ने बताया कि फैक्टरी में 200 नामी कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। यह पता लगाया जा रहा है कि दवा का कच्चा मैटेरियल कहां से आ रहा था। मैटेरियल बनाकर इन्हें बेचने वाले कौन-कौन लोग हैं।

ये दवाएं हुईं बरामद
एसपी देहात ने बताया कि फैक्टरी में एंटी बायोटिक, वायरल-फीवर, थ्रोट इंफेक्शन, किडनी इंफेक्शन, ब्लॅड प्रेशर, सर्दी, जुकाम, घावों को सुखाने समेत अन्य नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। 

टीम में ये रहे शामिल
कोतवाली प्रभारी मनोज मैनवाल, एसआई ठाकुर सिंह रावत, एसआई विनय मोहन द्विवेदी समेत सिपाही विनोद बर्तवाल, देवेंद्र चपराना, ड्रग इंस्पेक्टर रुड़की मानेंद्र सिंह राणा और ड्रग इंस्पेक्टर देहरादून नीरज कुमार।

देशभर में सप्लाई
पुलिस और ड्रग विभाग की टीम ने आरोपी फैक्टरी मालिक से पूछताछ की तो उसने कई बड़े खुलासे किए। पूछताछ में उसने बताया कि वह नकली दवाएं ज्यादातर वेस्ट यूपी में सप्लाई करता था। इसके अलावा उत्तराखंड, यूपी, पंजाब, हरियाणा, बंगलूरू समेत अन्य प्रदेशों में नकली दवाओं की सप्लाई की जाती थी। 

बड़ा गिरोह कर रहा है काम
एसपी देहात एसके सिंह ने बताया कि नकली दवाइयों को बनाने और उसे देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करने के पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। आरोपी फैक्टरी मालिक को रिमांड पर लेकर इनके बारे में पूछताछ की जाएगी। गिरोह में जो भी लोग सामने आएंगे, उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

एक डिब्बे की कीमत पांच हजार
टीम को मौके से एक नामी कंपनी के डिब्बे भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह दवा काफी महंगी है। इसके एक डिब्बे की कीमत बाजार में पांच हजार रुपये है। ऐसी ही कई और महंगी दवाएं बनाकर बेची जा रही थीं।

फार्मा कंपनी की नौकरी छोड़ उतरा शुरू किया काला कारोबार

नकली दवा फैक्टरी चलाने के आरोप में पकड़ा गया प्रवीण त्यागी शातिर दिमाग है। पुलिस जांच में पता चला कि वह करीब दस साल पहले एक फार्मा कंपनी में काम करता था। यहां उसने दवा बनाने और कच्चा मैटेरियल की पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद नौकरी छोड़कर उसने खुद की फार्मा कंपनी खड़ी कर दी। इसकी आड़ में वह नकली दवाएं बनाने लगा।

मूल रूप से मेरठ के रहने वाले प्रवीण त्यागी एक आम परिवार से ताल्लुक रखता है। सूत्रों के अनुसार, वह पहले उत्तराखंड में ही एक फार्मा कंपनी में नौकरी करता था। यहां उसने कई वर्षों तक नौकरी की। इस बीच उसने दो से तीन फार्मा कंपनियों में काम किया। यहां उसने दवा बनाने का हुनर सीखा। साथ ही यह भी जानकारी जुटा ली कि कच्चा मैटेरियल कहां से आता है। इतना ही नहीं वह यह भी जान गया कि कौन सी कंपनी और दवाई की अधिक मांग है।

नौकरी छोड़ने के बाद उसने रुड़की में मकान किराये पर लिया और माधोपुर में एक दवा फैक्टरी खोल ली। किसी को शक न हो, इसलिए उसने फैक्टरी का नाम वीआर फार्मा रखा। यहां वह नकली दवाएं बनाने के साथ नामी कंपनी के रैपर में पैकिंग भी कराता था। सूत्रों के मुताबिक, वह यह काम पिछले पांच-छह साल से कर रहा था। यहां उसने कोठी खड़ी कर दी और अकूत संपत्ति बना ली। एसपी देहात एसके सिंह ने बताया कि आरोपी का पुराना इतिहास खंगाला जा रहा है। 

सोता रहा विभाग, आरोपी करता रहा खेल
माधोपुर में नकली दवा फैक्टरी पकड़े जाने के मामले में स्थानीय और देहरादून ड्रग विभाग के अधिकारियों पर कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिस विभाग पर नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है, उसे ही नकली दवा फैक्टरी चलने की भनक नहीं लग पाई। विभाग के अधिकारी कुंभकरणीय नींद सोते रहे और आरोपी पिछले कई वर्षों से नकली दवाएं बनाता रहा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जो कार्रवाई ड्रग विभाग को करनी थी, वह पुलिस ने की। आखिर ड्रग विभाग को क्यों पता नहीं चल पाया कि माधोपुर में इतने वर्षों से नकली दवा की फैक्टरी चल रही थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed