धर्मांतरण का आरोप: चर्च की घटना के बाद प्रार्थना स्थलों की पड़ताल शुरू, जानकारी जुटाने में जुटा खुफिया विभाग
Roorkee Church Religion Conversion News: खुफिया विभाग से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, झबरेड़ा, मखदूमपर, धनौरी, सोलानीपुरम, खंजरपुर, कृष्णानगर में चर्च एवं प्रार्थना स्थलों से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।
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रुड़की के चर्च में बवाल के बाद शासन स्तर के आदेश पर पुलिस व खुफिया विभाग चर्च और प्रार्थना स्थलों का ब्योरा जुटा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रुड़की में हुई घटना को लेकर शासन गंभीर है। रविवार को एक चर्च में मारपीट और तोड़फोड़ की घटना के बाद भाजपा नेताओं समेेत ढाई सौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
वहीं, सोमवार को दूसरे पक्ष की एक महिला की तहरीर पर भी चर्च से जुड़े दस लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पुलिस की जांच के बीच धर्मांतरण के आरोपों की सच्चाई जानने के लिए कार्रवाई शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, शासन ने शहर के अलावा देहात क्षेत्रों में चर्च एवं प्रार्थना स्थलों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही इनसे जुड़े विवादों की जानकारी भी मांगी है।
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खुफिया विभाग से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, झबरेड़ा, मखदूमपर, धनौरी, सोलानीपुरम, खंजरपुर, कृष्णानगर में चर्च एवं प्रार्थना स्थलों से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, रुड़की की घटना अब तक का सबसे बड़ा मामला है। ऐसे में अब सभी धार्मिक स्थलों की बारीकी से डिटेल तैयार की जा रही है। इसे अधिकारियों और शासन को भेजे जाएगा।
जो भी कानून तोड़ने की कोशिश करेगा, उससे सख्ती से निपटा जाएगा। रुड़की की घटना के तुरंत बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। अप्रत्यक्ष रूप से इंटेलीजेंस को इस तरह के संस्थानों और घटनाओं के बाबत अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
-अशोक कुमार, डीजीपी, उत्तराखंड
काफी सोच-समझ के बाद दर्ज हुई दूसरे पक्ष की रिपोर्ट
धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामले में जहां एक ओर पुलिस ने बिना देरी किए भाजपा नेताओं समेत 250 लोगों पर रविवार दोपहर को ही मुकदमा दर्ज कर लिया था तो वहीं दूसरे पक्ष का मुकदमा अगले दिन लगभग उसी समय यानी 24 घंटे बाद दर्ज किया गया। रविवार देर रात तक दूसरे पक्ष के साथ भाजपाई तहरीर तक नहीं रिसीव करा पाए थे।
रुड़की में रविवार को चर्च में हुई तोड़फोड़ और मारपीट की घटना ने पुलिस-प्रशासन को सकते में ला दिया था। सूत्रों के अनुसार, मामले की गूंज दून से दिल्ली तक भी पहुंची। ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों की ओर से दिल्ली समेत विभिन्न प्रदेशों में स्थित अपने संस्थानों तक यह बात पहुंचाई गई। माना जा रहा है मानवाधिकार और अल्पसंख्यक आयोग की संभावित कार्रवाई को लेकर भी पुलिस प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा था।
शायद इसीलिए पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने में देरी नहीं की, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के साथ जैसे ही भाजपाइयों और हिंदूवादी संगठनों में प्रतिक्रिया तेज हुई तो पुलिस और प्रशासन की बेचैनी भी बढ़ने लगी, लेकिन पुलिस ने दूसरा पक्ष का मामला जल्दबाजी में दर्ज नहीं किया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार देर रात तक दूसरे पक्ष की महिलाओं समेत कई भाजपा नेता सिविल लाइंस कोतवाली में जमे रहे, लेकिन पुलिस ने तहरीर को रिसीव तक नहीं किया। इस दौरान कई आला नेताओं के फोन आते रहे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। रात करीब 11 बजे ये लोग कोतवाली से लौट आए। माना जा रहा है कि रात के बाद आधा दिन तक उच्च स्तर पर मंथन के बाद दूसरे पक्ष की रिपोर्ट दर्ज हुई।