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चारधाम यात्रा रूट पर लटक रही चट्टानें, कई स्थानों पर पड़ी दरारें

Fri, 24 Nov 2017 09:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 24 Nov 2017 09:52 AM IST
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Rocks hanging on Char Dham yatra route
चार धाम यात्रा मार्ग - फोटो : फाइल फोटो

चारधाम यात्रा रूट पर चट्टानें लटक रही हैं। इनमें कई स्थानों पर दरारें भी आ गई हैं। अगर भूकंप आता है तो ये चट्टाने गिरेंगी जिससे रास्ते बाधित होंगे और नुकसान बढ़ जाएगा।

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यह मुद्दा उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यक्रम में एचएनबी गढ़वाल विवि के जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट ने उठाया।

इस पर केंद्र सरकार के एटमिक एनर्जी रेग्यूलेटरी बोर्ड के सदस्य पद्मश्री प्रोफेसर हर्ष के. गुप्ता ने कहा कि इसका संज्ञान लिया जाना चाहिए। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैनर तले आयोजित ‘डिजास्टर रिजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रकचर इन दि हिमालयाज: अपॉरच्युनिटीज एंड चैलेंजेज’ के दूसरे दिन पैनल डिस्कशन में विज्ञानियों ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए।
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प्रोफेसर बिष्ट ने केदारनाथ में हो रहे निर्माण कार्यों के संबंध में भी सवाल उठाया। इस पर पैनल में बैठे विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। प्रोफेसर ‌ब‌िष्ट ने सुझाव दिया कि मौसम के प्रभाव से खतरनाक हुई चट्टानों का ब्योरा तैयार होना चाहिए।   
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इस मौके पर कहा गया कि चारधाम यात्रा रूट के समतल स्थानों जिन्हें चट्टियां कहते हैं, उन पर कस्बे आबाद हो गए हैं। इससे भूकंप में नुकसान हो सकता है। इस पर प्रोफेसर हर्ष ने कहा कि निर्माण ऐसे स्थानों पर हो रहे हैं जहां नहीं होने चाहिए।

इसका भी संज्ञान लिया जाए। पैनल डिस्कशन के पहले वैज्ञानिक सत्र में प्रोफेसर हर्ष ने भूकंपरोधी प्रक्रिया पर चर्चा की। इसके अलावा आईआईटी रुड़की के बीके माहेश्वरी, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कमल किशोर ने विचार व्यक्त किए।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी की प्रोफेसर इला पटनायक ने भूकंप के बाद लोगों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता के संबंध में बताया।
 

भूकंप आने पर इन स्थानों में सुरक्षा के लिए जाए

Rocks hanging on Char Dham yatra route
चार धाम - फोटो : file photo

‘डिजास्टर रिजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रकचर इन दि हिमालयाज: अपॉरच्युनिटीज एंड चैलेंजेज’ में आए विज्ञानियों ने एकमत होकर कहा कि भूकंप से बचाव के मामले में सिद्धांत और रणनीति पर चर्चा बहुत हो गई है। अब जरूरत है धरातल पर काम करने की।

अगर धरातल पर काम न हुआ तो चर्चा और सिद्धांत का कोई मतलब नहीं है। वैज्ञानिक सत्रों में कहा गया कि उत्तराखंड के भूकंप के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे स्थल चिन्हित किए जाएं जहां भूकंप आने पर लोगों को सुरक्षा के लिए पहुंचाया जाए। काठमांडु में पहले से सौ स्थल चिन्हित किए गए थे, वहां भूकंप आने पर लोगों को पहुंचाया गया था।

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