फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   rocket propelled grenade bomb khokha found in dehradun

देहरादून: रायपुर नहर में मिला बम का खोखा, बम निरोधक दस्ते ने लगाया अफवाहों पर विराम

Fri, 15 Mar 2019 10:34 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 15 Mar 2019 10:34 AM IST
विज्ञापन
rocket propelled grenade bomb khokha found in dehradun
अमर उजाला फाइल फोटो

रायपुर की छोटी नहर में गुरुवार को आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) बम का खोखा मिलने की खबर से अफरातफरी मच गई। बम निरोधक दस्ते ने जांच पड़ताल के बाद उसे खोखा करार दिया। बताया गया है कि फायरिंग अभ्यास के दौरान आर्मी ने इसका इस्तेमाल किया गया होगा।   

विज्ञापन


रायपुर क्षेत्र में आबादी के बीच से निकल रही छोटी नहर के पानी में गुरुवार दोपहर एक विस्फोटक मिलने की खबर से रायपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की घेराबंदी करा दी। कुछ देर बाद बम निरोधक दस्ते के सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने जांच में पाया कि यह आरपीजी बम का पिछला हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अभ्यास के दौरान चलाया गया होगा। इसे रॉकेट लांचर से चलाया जाता है। पास ही में आर्मी का ट्रेनिंग सेंटर है, जहां पर ट्रेनिंग के दौरान आर्मी इसका इस्तेमाल करती है।   
विज्ञापन


तीसरी आंख से भी नहीं लगा
ओल्ड मसूरी रोड पर बरामद हुए द्वितीय विश्व युद्ध के 40 कारतूस फेंकने वाले के बारे में सीसीटीवी फुटेज से भी कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस जांच में आया है कि बरामद कारतूस 1943 की आयुध फैक्ट्री से संबंधित हैं। उस समय .30 बोर का लाइसेंस भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजपुर पुलिस ने बुधवार रात ओल्ड मसूरी रोड पर 40 कारतूस बरामद किए थे। प्रारंभिक जांच में बरामद कारतूस दूसरे विश्व युद्ध के होने की जानकारी मिली। पुलिस ने कारतूस फेंकने वाले की पहचान करने के लिए पूरी ताकत झाेंक रखी है। आसपास रहने वाले लोगों के अलावा सीसीटीवी फुटेज का भी अवलोकन किया जा रहा है। एसओ नत्थीलाल उनियाल ने बताया कि फुटेज से अभी तक किसी तरह का सुराग नहीं लगा है। कारतूसों पर डब्लूसीसी -1943 लिखा है। यह कारतूस उस समय की एक आयुध फैक्ट्री से संबंधित प्रतीत हो रहे हैं। .30 का बोर बरसों पहले चलता था। इसका लाइसेंस केन्द्र सरकार की तरफ से जारी होता था। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी के पास बरसों से यह कारतूस जमा थे। किसी तरह की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इन्हें मसूरी रोड पर फेंका गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed