सीमा पर चीन के सामने 'फिसड्डी' हुआ भारत
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एक तरफ चीन है जिसने भारत की सीमा के पास सड़कों के साथ ही रेल मार्ग तक बना दिए हैं, वहीं भारत की ओर से चीन सीमा की ओर बनाई जा रही सड़कों के निर्माण में बेहद सुस्ती चल रही है।
कुमाऊं में चीन सीमा की तरफ मुनस्यारी से मिलम (62 किमी), न्यू सोबला से तेदांग (42.40 किमी) और गुंजी से ज्वालिकांग (32.10 किमी) तीन सड़कों का निर्माण कार्य 2008 से चल रहा है।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये सड़कें 2012 में पूरी बन जानी थी लेकिन अब तक 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ही अभी वाहनों के चलने लायक बन सका है। बीआरओ द्वारा बनाई जा रही इन सड़कों में कुछ स्थान पर अलाइनमेंट भी गलत बना है।
इस क्षेत्र में करीब तीन साल तक रहकर आए आईटीबीपी के अफसर और वर्तमान में अल्मोड़ा स्थित माउंटेन ड्राइविंग स्कूल के इंचार्ज बीएस मर्तोलिया ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र में तैनाती के दौरान मुनस्यारी-मिलम मार्ग में धापा बैंड से क्वीरीगाड़ तक करीब पांच किमी दूरी कम करके सड़क को सीधे सामने की पहाड़ी में जोड़ने सहित अन्य सुझाव दिए थे।
इस पर ग्रिफ ने भी सहमति जताई थी लेकिन आज तक इस सड़क का अलाइनमेंट नहीं बदला गया है। उन्होंने बताया कि मुनस्यारी से मिलम के लिए बनाई जा रही सड़क को धापा बैंड से क्वीरीगाड़ तक बेवजह पांच किमी बढ़ाया जा रहा है।
सड़कों के निर्माण में बेहद सुस्ती
इस पांच किमी क्षेत्र में पहाड़ी इतनी खतरनाक है कि वहां पहले तो सड़क काटना मुश्किल है और यदि काट भी दी गई तो वह टिक नहीं पाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि न्यू सोबला से तेदांग और गुंजी से ज्वालिकांग के लिए बनाई जा रही सड़कों का निर्माण भी धीमी गति से चल रहा है।
मुनस्यारी मिलम मार्ग में करीब 13 किमी, न्यूसोबला-तेदांग रोड में आठ किमी और गुंजी-ज्वालिकांग रोड में नौ किमी क्षेत्र में ही लोकल वाहन चल रहे हैं। हालांकि कटिंग इससे लगभग दोगुनी हो चुकी है।
उन्होंने निर्माण में गति के लिए जमीन संबंधी विवादों को खत्म करने और मशीनों का प्रयोग बढ़ाने के साथ ही पर्याप्त संख्या में मजदूर और ऑपरेटर तैनात करने का सुझाव दिया है।
ये सड़कें बन रहीं चीन सीमा पर
- मुनस्यारी से मिलम (62 किमी)
- न्यू सोबला से तेदांग (42.40 किमी)
- गुंजी से ज्वालिकांग (32.10 किमी)
पांच किमी क्षेत्र में अलाइनमेंट बदलने का प्रपोजल केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय को भेजा गया था। अभी वहां से मंजूरी नहीं मिली है। तीनों सड़कों के निर्माण के लिए फेज वाइज मंजूरी मिल रही है। वन अधिनियम और जमीन संबंधी विवादों का भी निस्तारण होना है जिससे काम में समय लग रहा है। बीआरओ के स्तर से कोई विलंब नहीं हो रहा है।
- राकेश शुक्ला, संयुक्त निदेशक बीआरओ