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नदियों के बाढ़ परिक्षेत्र में नहीं मिलेगी निर्माण की अनुमति
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 19 Feb 2017 09:11 PM IST
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- फोटो : file photo
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उत्तराखंड में अब नदियों के बाढ़ परिक्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। अब शासन स्तर से तय होगा कि नदियों के किनारे कितनी दूरी तक किस तरह के निर्माण को मंजूरी प्रदान की जाए।
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नदियों का बाढ़ परिक्षेत्र तय करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से सर्वे किया जाएगा। सिंचाई विभाग की ओर गंगा नदी का हरिद्वार से लक्सर तक और भागीरथी नदी का गंगोरी से उत्तरकाशी तक बाढ़ परिक्षेत्र का सर्वे पूरा कर लिया गया है। इन दोनों जनपदों के जिला बाढ़ परिक्षेत्रण अधिकारियों (डीएम) द्वारा सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन स्तर से इस रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके बाद इसे अधिसूचित किया जाएगा।
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नदियों में बाढ़ आने की स्थिति में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए लिहाज से उनका बाढ़ परिक्षेत्र बनाने की योजना शासन स्तर से तैयार की गई है। नदियों का बाढ़ परिक्षेत्र तय करने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। सिंचाई विभाग को प्रदेश की सभी प्रमुख नदियों का बाढ़ परिक्षेत्र तय करना है। पहले चरण में विभाग की ओर से गंगा नदी का हरिद्वार से लक्सर तक और भागीरथी नदी का गंगोरी से लक्सर तक बाढ़ परिक्षेत्र किया गया है।
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सिंचाई विभाग ने इन नदियों में पिछले 100 सालों के दौरान आई बाढ़ के आधार पर बाढ़ परिक्षेत्र की रिपोर्ट तैयार की है। इसमें खासतौर पर यह उल्लेख किया गया है कि इन नदियों में बाढ़ आने की स्थिति में पानी कहां तक पहुंच सकता हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर ही इन दोनों जिलों में नदियों के किनारे की भू उपयोग का वर्गीकरण किया जाएगा। जिसके आधार पर तय होगा कि नदियों के किनारे कितनी दूरी से किस तरह के निर्माण को मंजूरी प्रदान की जाए। नदियों के बाढ़ परिक्षेत्र में जो निर्माण हो चुका है उसको विस्थापित भी किया जा सकता है, क्योंकि फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट में विस्थापन की व्यवस्था है।
हरिद्वार से लक्सर तक गंगा नदी का और भागीरथी नदी का गंगोरी से उत्तरकाशी तक बाढ़ परिक्षेत्र सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। परीक्षण के बाद शासन द्वारा इसे अधिसूचित किया जाएगा। सिंचाई विभाग द्वारा प्रदेश की अन्य नदियों के बाढ़ परिक्षेत्र का सर्वे किया जाएगा।
- अजय वर्मा, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग