ऋषिकेश: गंगा स्नान के लिए गईं हरियाणा की दो सगी बहनें और ननद तेज बहाव में बहीं, नहीं लगा कोई सुराग
हरियाणा का एक परिवार धार्मिंक अनुष्ठान और कर्मकांड के लिए हरिद्वार आया था। परिवार हरिपुरकलां के आश्रम में रुका था। रविवार सुबह चार बजे परिवार की दो सगी बहनें और उनकी ननद गंगा स्नान के लिए गीता कुटीर घाट पर पहुंचीं।
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ऋषिकेश में रायवाला थाना क्षेत्र के हरिपुरकलां में गीता कुटीर घाट पर गंगा स्नान कर रहीं हरियाणा की दो सगी बहनें और उनकी ननद गंगा के तेज बहाव में बह गईं। मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया, लेकिन देर रात तक कोई सुराग नहीं लग पाया।
हरियाणा का एक परिवार धार्मिंक अनुष्ठान और कर्मकांड के लिए हरिद्वार आया था। परिवार हरिपुरकलां के आश्रम में रुका था। रविवार सुबह चार बजे परिवार की दो सगी बहनें और उनकी ननद गंगा स्नान के लिए गीता कुटीर घाट पर पहुंचीं। तीनों हाथ पकड़ कर गंगा स्नान कर रही थीं। इस दौरान गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया। दोनों महिलाएं और युवती तेज बहाव में आकर बहने लगे। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने तीनों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तीनों महिलाएं गंगा की धारा में ओझल हो गईं।
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने सुबह करीब 4.15 बजे पर पुलिस कंट्रोल रूम में तीनों के गंगा में बहने की सूचना दी। रायवाला थानाध्यक्ष भुवनचंद्र पुजारी जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सुबह करीब 4.25 बजे टीम ने रेस्क्यू अभियान के लिए तीन राफ्ट नदी में उतारीं। रेस्क्यू टीम गीता कुटीर से लेकर भीमगोड़ा बैराज तक तीनों की खोजबीन में जुटी है, लेकिन देर रात तक तीनों का कुछ पता नहीं चल पाया।
रायवाला थानाध्यक्ष भुवनचंद्र पुजारी ने बताया कि गंगा में बहने वालों की पहचान कुसुम (36) पत्नी राजेश निवासी खानपुरकलां, सीमा (34) पत्नी नरेंद्र, निवासी ग्राम पादची थाना गन्नौर और नेहा (24) पुत्री सतवीर, निवासी ग्राम केसरी, तहसील गन्नौर, जिला सोनीपत, हरियाणा के रूप में हुई है। कुसम और सीमा सगी बहनें और नेहा उनकी ननद है।
यात्रियों के लिए काल बने सप्तऋषि क्षेत्र के घाट
सप्तऋषि क्षेत्र के घाट यात्रियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। नदी से सटे आश्रमों ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्नान घाट बनाए हैं, लेकिन इन घाटों पर रेलिंग, चेन, जलस्तर के चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। घाटों के आसपास बाढ़ सुरक्षा के लिए लगाए गए क्षतिग्रस्त जाल का खतरा बने हुए हैं।
हरियाणा से आई दो सगी बहनें कुसम और सीमा व उनकी ननद नेहा रविवार सुबह हरिपुरकलां स्थित गीता कुटीर घाट पर स्नान के लिए पहुंची थीं। तब पानी का जलस्तर काफी कम था। तीनों को घाट के किनारे नहाने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में तीनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर नदी में कुछ आगे तक चली गईं। इस बीच अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ गया। समय रहते तीनों पानी बढ़ने का अंदाजा नहीं लगा पाईं। यही चूक उनकी जिंदगी पर भारी पड़ हुई। तीनों नदी के तेज बहाव में बह गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों ने एक दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा, लेकिन कुछ देर तक संघर्ष के बाद तीनों गंगा की तेज धारा में ओझल हो गईं।
सप्तऋषि क्षेत्र में कई संवेदनशील घाट हैं। स्नान घाटों पर आए दिन यात्रियों और फक्कड़ों के डूबने के मामने सामने आते हैं। असल में आसपास के आश्रमों की ओर से बनाए गए स्नान घाटों पर सुरक्षा उपायों को लेकर संचालक और उत्तराखंड सिंचाई विभाग दोनों ही गंभीर नहीं है। इनमें से कई घाटों पर रेलिंग नहीं है, जहां रेलिंग है वह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गंगा घाटों की अधिकांश चेन टूटी हुई हैं।
भूकटाव को रोकने के लिए लगाए गए जाल क्षतिग्रस्त होने के बाद घाटों के आसपास आ जाते हैं। कई बार यात्री इन जालों में उलझकर नदी में बह जाते है। पूर्व में मेलाधिकारी दीपक रावत ने सप्तऋषि क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान उत्तराखंड सिंचाई विभाग को घाटों पर रेलिंग, चेन की मरम्मत और जलस्तर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
संबंधित अधिकारियों से तीनों यात्रियों के बहने के घटनाक्रम की जानकारी ली जाएगी। अगर घाटों के आसपास सुरक्षा इंतजामों की कमी की बात सामने आती है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
-डॉ. अपूर्वा पांडेय (आईएएस), एसडीएम, ऋषिकेश