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90 साल पुराना लक्ष्मण झूला होगा धरोहर में तब्दील, आधुनिक तकनीक से होगा संरक्षित

Wed, 17 Jul 2019 08:50 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 17 Jul 2019 08:50 AM IST
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Rishikesh lakshman jhula bridge will be Convert into heritage soon
लक्ष्मण झूला - फोटो : फाइल फोटो

सरकार ने लक्ष्मण झूला की रेट्रोफिटिंग कर उसे संरक्षित कर धरोहर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। झूले के एक ओर के झुके पिलर को आधुनिक तकनीक से दोबारा आवाजाही का वजन सहने लायक बनाया जाएगा।

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इसके लिए ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी ने अपने विशेषज्ञों की मदद देने के लिए सोमवार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के साथ मिलकर संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह भी संभावना तलाशी जा रही है कि पुल को संरक्षित कर केवल पर्यटन और तीर्थाटन के लिहाज से खोला जाए।
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ऋषिकेश में ब्रिटिश काल में बने लक्ष्मण झूल पुल को सरकार सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने पुल को आवाजाही के लिए उपयुक्त नहीं पाया था, जिसके बाद पुल को सामान्य आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्मण झूला उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर है। पिछले 90 सालों से यह देश व दुनिया के पर्यटकों व श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला को संरक्षित करने के लिए यथा संभव प्रयास किए जाएंगे। 

आईआईटी की रिपोर्ट का होगा अध्ययन 

इस पुल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पर आवाजाही दोबारा शुरू होने की स्थिति के संबंध में विशेषज्ञों से और सुझाव लिए जाएंगे। प्रारंभ में इसके एक स्क्वायर मीटर में 200 किलो भार क्षमता आंकी गई थी।

वर्तमान में इसका पिलर झुक रहा है। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि कैसे पुल को ठीक किया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय से डॉ. पार्थो सेन, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. अंकुश मित्तल, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. पवन कुमार इमानी आदि उपस्थित रहे। 

पुल बंद करने से पहले उसका तकनीकी अध्ययन आईआईटी के वैज्ञानिकों ने किया है। पुल को मूल स्वरूप से संरक्षित करन से पहले आईआईटी की रिपोर्ट के हर पहलू का गहनता से अध्ययन किया जाए।

मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि इसके संरक्षण में कोई तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकती है तो इस दिशा में भी पहल की जाए। उन्होंने ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाने को कहा। 

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