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कुत्तों को गली से भगाया तो होगी कार्रवाई
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 13 Feb 2014 12:50 AM IST
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अपनी गली के आवारा कुत्तों से परेशान हैं तो परेशान रहने में ही भलाई है। कुत्तों को आपसे कोई परेशानी हुई तो कानूनी उलझन हो सकती है।
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आपकी तरह इन कुत्तों को भी मूल निवासी होने का अधिकार है। इसलिए इन्हें जबरदस्ती गली से नहीं खदेड़ा जा सकता।
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कुत्तों को यह अधिकार देता है पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम। यही कारण है कि कुत्तों के खिलाफ लोगों की शिकायतों को नगर निगम अनसुना कर देता है।
साठ हजार के करीब कुत्तों की आबादी
इस समय दून शहर की जनसंख्या करीब आठ लाख है। जबकि आवारा कुत्तों के संख्या साठ हजार के आसपास। रात होते ही आवारा कुत्ते हिंसक हो जाते हैं।
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दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में हर रोज तीन से सात डॉग बाइट के केस आ रहे हैं। कुत्तों से परेशान लोग नगर निगम से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं, लेकिन अधिनियम के कारण नगर निगम के हाथ बंधे हैं।
अपनी गली का मूल निवासी
अधिनियम के तहत जो कुत्ता जिस गली में पैदा होता है या मौजूदा समय में रह रहा है उसे वहीं का मूल निवासी होने का अधिकार है। अगर उसे जबरन शिफ्ट किया गया तो वह अपराध की श्रेणी मेें आएगा।
वापस गली में छोड़ना होगा
वरिष्ठ मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया किसी भी कुत्ते को सिर्फ बीमार होने पर उसकी गली से उठाकर अस्पताल लाया जा सकता है। कुत्ते के ठीक होने के बाद उसे उसी गली में छोड़ना होता है।
सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश
पीपुल फॉर एनीमल (पीएफए) की सचिव गौरी मौलखी ने बताया कि पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के तीन निर्णय भी कुत्तों को मूल निवासी होने का अधिकार देते हैं। इसलिए किसी भी स्ट्रीट डॉग को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।
क्या कहता है अधिनियम
पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम 1960 में बनाया गया। इसमें पशुओं की क्रूरता के खिलाफ सजा का प्रावधान है। समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे। एक संशोधन के तहत वर्ष 2002 में आवारा कुत्तों को पूरे देश में मूल निवासी होने का अधिकार प्राप्त हुआ।
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इससे पहले नगर निगम शिकायत मिलने पर आवारा कुत्तों को शहर से बाहर शिफ्ट कर देता था। ऐसे में कुत्ता या तो भुखमरी का शिकार होकर मर जाता था या किसी तरह अपनी गली में लौट आता था।