जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण सूची जारी

अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 26 Nov 2013 10:58 AM IST
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reserve list released for the post of district panchayat president

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उत्तराखंड शासन ने रविवार देर शाम जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण सूची जारी कर दी। देहरादून आखिरकार इस बार सामान्य सीट हो गई।
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अधिकतर सीटें पर्वतीय जिलों के खाते में
महिला कोटे की अधिकतर सीटें पर्वतीय जिलों के खाते में गईं। बागेश्वर पर मेहरबानी हुई और पिछली बार की सामान्य सीट इस बार भी सामान्य घोषित की गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर खासी मशक्कत के बाद ही आरक्षण जारी हो पाया।
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इसके लिए हालांकि जिला पंचायतों में आरक्षण का चौथा चक्र (वर्ष 1996 का चुनाव) लिया गया। इसका फर्क यह पड़ा कि देहरादून के सामान्य सीट होने का रास्ता खुल गया। 12 जिलों में छह सीट महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। वहीं इस बार हरिद्वार में चुनाव नहीं हो रहा।

अनुसूचित जनजाति के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं हुई, जबकि 2008 में महिला सीट रही नैनीताल इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इसी तरह चमोली है जो लगातार दो बार महिला आरक्षण की जद में आई है।

चमोली महिला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
चमोली इस बार महिला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। वहीं, बागेश्वर 2008 में सामान्य थी और इस बार भी सामान्य ही है। जाहिर है कि बागेश्वर पर रोटेशन लागू ही नहीं हुआ।

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देहरादून सीट के सामान्य होने से अब पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह के भाई चमन सिंह और कांग्रेसी रामशरण नौटियाल आदि के चुनाव मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो गया है। दोनों ही एक-एक बार देहरादून से जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं।

मुन्ना चौहान की पत्नी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। आरक्षण पर अब घमासान खुल कर सामने आने की भी संभावना है। सोमवार को इस मामले में शासन में एक बार फिर से मंथन होने की संभावना है।

अब आगे क्या
- शासन ने 26 नंवबर से 27 नवंबर तक आरक्षण पर आपत्तियां मांगी हैं। यह आपत्तियां सचिव और जिलाधिकारी को सौंपी जा सकती हैं।
- 29 को आपत्तियों का निराकरण करने केबाद फाइनल सूची जारी होगी। इसी दिन राज्य निर्वाचन आयोग को सूची भेजी जाएगी।

इनका कहना है
आरक्षण में मनमानी हुई है। देहरादून सीट को सामान्य करने के लिए यह सारी कवायद हुई। पहले इस बात का निराकरण होना चाहिए था कि आखिरकार जिला पंचायत में चौथा चक्र किस हिसाब से लिया गया। परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर हुआ। ओबीसी का सर्वे हाल में कराया गया। जिस सीट पर फायदा दिखा उस सीट को सामान्य किया गया।
- मधु चौहान, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष

पंचायत मंत्री के सामने आपत्तियां रखी गई हैं। जिला पंचायतों का आरक्षण 1996 में लखनऊ से तय हुआ था और ग्राम पंचायतों का जिला स्तर से। चौथा चक्र लेना ही था तो ग्राम पंचायतों में लिया जाना चाहिए था। जिला पंचायतों में 2003 को आधार मानते हुए तीसरा चक्र लागू किया जाना चाहिए था।
- जोत सिंह बिष्ट, वरिष्ठ कांग्रेसी

सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण में भारी गड़बड़ी की है। पंचायत चुनाव में चक्रानुक्रम आरक्षण की व्यवस्था को कतई लागू नहीं किया गया। जिलों में मंत्रियों के हिसाब से अध्यक्ष की श्रेणी तय हुई। कहीं मंत्री का दबाव रहा तो कहीं नेता का। कार्यकर्ताओं में सरकार के इस रवैये को लेकर रोष है। हो सकता है मामला हाईकोर्ट भी पहुंच जाए।
- तीरथ सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

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