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प्रमोशन में आरक्षण : 15 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, मजबूत पैरवी करने को उतारेंगे दिग्गज वकील
Sat, 11 Jan 2020 10:40 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 11 Jan 2020 10:40 AM IST
सार
- 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, फैसला आने के आसार
- एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन की ओर से कपिल सिब्बल कर चुके है पैरवी
- वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार को जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन कोर्ट में उतारेगी
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रमोशन में आरक्षण के मामले में 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई है। जिसमें बड़ा फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसलिए सुनवाई के दौरान अपने अपने पक्ष में मजबूत पैरवी करने के लिए प्रमोशन में आरक्षण के समर्थन और विरोध को लेकर आंदोलनों की अगुआई कर रहे कर्मचारी संगठन दिग्गज वकीलों को मोर्चे पर उतारने की तैयारी में जुट गए हैं।
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उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन दिग्गज अधिवक्ता कपिल सिब्बल को कोर्ट में उतार चुकी है। वहीं प्रदेश सरकार में सेवायोजन अधिकारी कुंवर सिंह मेवाड़ के पक्ष में पैरवी का दारोमदार सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार पर हो सकता है।
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मेवाड़ का उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज फेडरेशन समर्थन कर रहा है। पहली सुनवाई में एसोसिएशन ने उनसे ही पैरवी कराई थी। उधर, प्रदेश सरकार की पैरवी का मोर्चा केंद्र सरकार के पूर्व महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी संभालेंगे। एसोसिएशन ने शुक्रवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें न्यायालय और आंदोलन के मोर्चे पर आगे की रणनीति पर मंथन होगा।
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कर्मचारियों की लगी है निगाह
प्रदेश सरकार में कार्यरत आरक्षित और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की निगाह सुप्रीम कोर्ट पर लगी है। प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उसे लागू करना प्रदेश सरकार की बाध्यता हो जाएगी। नैनीताल उच्च न्यायालय ने एक अप्रैल 2019 को प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगाने वाले आदेश को निरस्त कर दिया था।
आठ महीने से प्रमोशन लटके
उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद उत्तराखंड एससी एसटी इम्प्लाइज फेडरेशन ने 2006 की अधिसूचना के तहत प्रमोशन में आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के बाद डीपीसी और पदोन्नतियों पर तत्काल रोक लगा दी। करीब आठ महीने से प्रदेश में प्रमोशन नहीं हुए हैं। सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की है। उसका कहना है कि प्रमोशन में आरक्षण के बारे में फैसला करने का अधिकार प्रदेश सरकार का है।
एसोसिएशन प्रमोशन में आरक्षण के विरोध में है। सर्वोच्च न्यायालय में अपने पक्ष में प्रभावी पैरवी के लिए रणनीति बनाने को शुक्रवार को एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई है। संगठन न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे मेवाड़ का समर्थन कर रहा है। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार हमारे वकील हैं। - वीरेंद्र सिंह गुसांई, प्रदेश महासचिव, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
- हम चाहते थे कि सरकार एसएलपी वापस लेती, लेकिन एससी-एसटी वर्ग की इस मांग को सरकार ने अनसुना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में फेडरेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी। जल्द ही फेडरेशन तय करेगा कि 15 जनवरी को सुनवाई के दौरान और कौन कौन अधिवक्ता पैरवी कर सकते हैं। - करम राम, उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन