प्रमोशन में आरक्षण: होली के बाद आक्रामक होगा आंदोलन, मंत्री-विधायकों के घेराव की तैयारी
- अब तक मांग के समर्थन में भाजपा के चार विधायक लिख चुके हैं मुख्यमंत्री को पत्र
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उत्तराखंड में होली के बाद प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ जारी आंदोलन आक्रामक रुख अख्तियार करेगा। जनपदों के स्तर पर सत्तारूढ़ भाजपा के सांसदों और विधायकों के घेराव हो रहे हैं। होली के बाद घेराव की यह मुहिम जोर पकड़ेगी। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के संयोजक मंडल की आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपील और घेराव की मुहिम के तहत भाजपा के चार विधायक आंदोलन के समर्थन में खुलकर आ चुके हैं। उन्होंने एसोसिएशन के समर्थन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखा है।
एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता विनोद धस्माना के मुताबिक, दो मार्च से जनरल ओबीसी बेमियादी हड़ताल पर हैं। आंदोलन में जनरल ओबीसी कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों, ब्लाकों और तहसीलों तक में कामकाज पूरी तरह से ठप है। 11 मार्च से अति आवश्यक सेवाओं को ठप करने के विकल्प पर भी बहुत गंभीरता से विचार हो रहा है।
इन विधायकों ने किया समर्थन
अब तक भाजपा के चार विधायक खुलकर आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। रायपुर के भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और मसूरी के विधायक गणेश जोशी सबसे पहले पक्ष में आए थे और उन्होंने सीएम को पत्र लिखा। लैंसडाउन के विधायक दिलीप सिंह रावत ने भी आंदोलन के समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। रुद्रप्रयाग के विधायक भरत चौधरी ने घेराव के बाद समर्थन किया। उधर, नैनीताल के सांसद अजय भट्ट ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता करने की बात कही।
होली नहीं मनाएंगे
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि जनरल ओबीसी कर्मचारी सरकार की हठधर्मिता विरोध में इस बार होली नहीं मनाएंगे। होली के बाद एसोसिएशन नई और धारदार रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। जोशी के मुताबिक, आंदोलन को तोड़ने की तमाम साजिशों के बावजूद प्रदेश का जनरल ओबीसी कर्मचारी पूरी एकजुटता के साथ आंदोलन को कामयाबी के मुकाम तक पहुंचाने को बेताब है।
एस्ट्रोसिटी के एक्ट में झूठे केस दर्ज करने की जताई आशंका
अखिल भारतीय समानता मंच ने एससी एसटी प्रिवेशन ऑफ एस्ट्रोसिटी एक्ट के तहत बेमियादी हड़ताल में शामिल जनरल ओबीसी कर्मचारियों पर झूठे केस दर्ज कराने की आशंका जाहिर की है। मंच ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और उनसे ऐसे मामलों में जांच के बाद ही केस दर्ज करने का अनुरोध किया है।
मंच के राष्ट्रीय सचिव एलपी रतूड़ी, प्रांतीय अध्यक्ष श्याम लाल शर्मा व प्रांतीय महासचिव जगदीश प्रसाद कुकरेती ने पत्र में कहा है कि एससी एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी की जो व्यवस्था दी गई है, वह अनुचित व अन्यायपूर्ण है। प्रदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने सात फरवरी को प्रमोशन में आरक्षण न दिए जाने संबंध में आंदोलन किया जा रहा है।
ऐसे हालातों में कुछ शरारती तत्व निजी स्वार्थ से दूसरे पक्ष के मध्य भ्रम की स्थिति पैदा कर व कटुता को बढ़ाकर आंदोलन के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करना चाहते हैं। इस बात की प्रबल संभावना है कि एससी एसटी प्रिवेशन ऑफ एस्ट्रोसिटी एक्ट के तहत जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों व सदस्यों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। इससे सामाजिक ताने बाने के छिन्न भिन्न होने का खतरा भी पैदा हो जा जाएगा। इसलिए ऐसे मामलों में उचित जांच में अपराध सही पाए जाने पर केस दर्ज किया जाए।