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Dehradun News: 56 करोड़ का जुर्माना लगा चुका रेरा, 100 मामलों में एक पैसे वसूल नहीं
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उत्तराखंड भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेश भी बिल्डरों पर शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं। शिकायतों की सुनवाई कर रेरा सैकड़ों बिल्डरों पर जुर्माना लगा चुका है। लेकिन, सरकारी मशीनरी पर निर्भरता के कारण जुर्माने की अदायगी नहीं हो पा रही है। ऐसे में खरीदारों के पक्ष में निर्णय होने के बाद भी पीड़ित को लाभ नहीं मिल पा रहा।
खरीदारों में यह धारणा आम होती जा रही है कि बिल्डरों से वसूली के रेरा के आदेशों का धरातल पर अमल कम ही हो पाता है। रेरा खुद भी इसे महसूस कर रहा है। दरअसल, रेरा खरीदारों के हितों की रक्षा में बिल्डरों पर जुर्माना तो लगा रहा है। लेकिन, आदेशों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार सरकारी मशीनरी बिल्डरों से वसूली नहीं करा पा रही है।
आलम यह है कि रेरा ने स्थापना के बाद से खरीदारों से फर्जीवाड़े की शिकायतों पर 148 मामलों में 56 करोड़ की वसूली के लिए आरसी जारी की। लेकिन, जिला प्रशासन बिल्डरों से अपेक्षाकृत वसूली नहीं करा पाया। 148 में से मात्र 18 मामलों में वसूली की जा सकी, 30 मामलों में आंशिक वसूली हुई। 100 मामलों में जुर्माने का एक पैसा भी नहीं वसूला गया।
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केस एक
राजपुर रोड एनक्लेव में रहने वाली कविता भाटिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने पुष्पांजलि रियलएम इन्फोटेक से आर्चिड पार्क में एक करोड़, 15 लाख, के फ्लैट को खरीदने का एग्रीमेंट किया। 58 लाख का भुगतान भी कर दिया। दो साल तक कंपनी ने फ्लैट का निर्माण शुरू नहीं कराया। शिकायत पर पुष्पांजलि के निदेशकों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
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केस दो
शिक्षिका निशा बंसल ने हरिद्वार बाईपास रोड पर अजबपुर खुर्द में बन रही सोसाइटी में 74 लाख का फ्लैट खरीदने के लिए सवा दो लाख एडवांस देकर अपना मकान बुक करा दिया। उन्होंने 56 लाख रुपये का बैंक लोन लेकर पूरी किश्तें भी चुका दीं, लेकिन उन्हें फ्लैट नहीं दिया गया। शिकायत पुलिस से की तो मुकदमा दर्ज किया गया है।
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फर्जीवाड़े की शिकायतों की सुनवाई के बाद रेरा बिल्डरों पर जुर्माना लगाकर वसूली के लिए आरसी जारी कर रहा है। देरी होने पर बिल्डरों को ब्याज समेत जुर्माना देने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। वसूली में प्रशासनिक सहयोग प्राप्त करने के लिए संवाद स्थापित किया जा रहा है।
-नरेश सी मठपाल, सदस्य, रेरा
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देहरादून में रेरा की ओर से जारी आदेशों का पालन कराने का पूरा प्रयास होता है। कई बार स्टाफ की कमी के कारण जुर्माना वसूली प्रभावित होती है। जल्द ही इस कार्य में तेजी लाई जाएगी।
-- केके मिश्रा, एडीएम फाइनेंस
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खरीदारों में यह धारणा आम होती जा रही है कि बिल्डरों से वसूली के रेरा के आदेशों का धरातल पर अमल कम ही हो पाता है। रेरा खुद भी इसे महसूस कर रहा है। दरअसल, रेरा खरीदारों के हितों की रक्षा में बिल्डरों पर जुर्माना तो लगा रहा है। लेकिन, आदेशों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार सरकारी मशीनरी बिल्डरों से वसूली नहीं करा पा रही है।
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आलम यह है कि रेरा ने स्थापना के बाद से खरीदारों से फर्जीवाड़े की शिकायतों पर 148 मामलों में 56 करोड़ की वसूली के लिए आरसी जारी की। लेकिन, जिला प्रशासन बिल्डरों से अपेक्षाकृत वसूली नहीं करा पाया। 148 में से मात्र 18 मामलों में वसूली की जा सकी, 30 मामलों में आंशिक वसूली हुई। 100 मामलों में जुर्माने का एक पैसा भी नहीं वसूला गया।
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केस एक
राजपुर रोड एनक्लेव में रहने वाली कविता भाटिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने पुष्पांजलि रियलएम इन्फोटेक से आर्चिड पार्क में एक करोड़, 15 लाख, के फ्लैट को खरीदने का एग्रीमेंट किया। 58 लाख का भुगतान भी कर दिया। दो साल तक कंपनी ने फ्लैट का निर्माण शुरू नहीं कराया। शिकायत पर पुष्पांजलि के निदेशकों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
केस दो
शिक्षिका निशा बंसल ने हरिद्वार बाईपास रोड पर अजबपुर खुर्द में बन रही सोसाइटी में 74 लाख का फ्लैट खरीदने के लिए सवा दो लाख एडवांस देकर अपना मकान बुक करा दिया। उन्होंने 56 लाख रुपये का बैंक लोन लेकर पूरी किश्तें भी चुका दीं, लेकिन उन्हें फ्लैट नहीं दिया गया। शिकायत पुलिस से की तो मुकदमा दर्ज किया गया है।
फर्जीवाड़े की शिकायतों की सुनवाई के बाद रेरा बिल्डरों पर जुर्माना लगाकर वसूली के लिए आरसी जारी कर रहा है। देरी होने पर बिल्डरों को ब्याज समेत जुर्माना देने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। वसूली में प्रशासनिक सहयोग प्राप्त करने के लिए संवाद स्थापित किया जा रहा है।
-नरेश सी मठपाल, सदस्य, रेरा
देहरादून में रेरा की ओर से जारी आदेशों का पालन कराने का पूरा प्रयास होता है। कई बार स्टाफ की कमी के कारण जुर्माना वसूली प्रभावित होती है। जल्द ही इस कार्य में तेजी लाई जाएगी।