दो माह पहले ही तय हो गया था रेणुका का नाम
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के परिवार से पहले उनकी पुत्री अनुपमा रावत को टिकट की दावेदार माना जा रहा था। लेकिन युवा जोश पर रेणुका रावत का राजनीतिक अनुभव भारी पड़ा।
हरीश रावत की धर्मपत्नी रेणुका रावत की हरिद्वार लोकसभा सीट से दावेदारी दो महीने पहले तय हो गई थी। रेणुका अचानक हरिद्वार में सक्रिय हुई तभी से सबकी नजरें उन पर टिक गई थी।
वर्ष 2009 में हरीश रावत के हरिद्वार से चुनाव लड़ने के दौरान उनके पूरे परिवार ने यहां जमकर प्रचार किया था। पत्नी रेणुका रावत, पुत्री अनुपमा रावत और पुत्रों ने पूरे संसदीय क्षेत्र में घूमकर हरीश रावत के लिए वोट मांगे थे।
चुनाव के बाद परिवार के अन्य सदस्यों की सक्रियता तो कम हुई लेकिन हरीश रावत की पुत्री अनुपमा यहां फिर भी सक्रिय रही। तब से यही माना जा रहा था कि हरिद्वार में हरीश रावत की सियासत की सारथी अनुपमा बनेंगी।
रावत के सीएम बनते ही तय होने लगी थी जमीन
हरीश रावत ने अपनी बेटी अनुपमा रावत की शादी के लिए भी यहीं मंडप सजाया। ऋषिकुल मैदान में जिले के हजारों लोग अनुपमा की शादी के गवाह बने।
रावत सीएम बने तो लोग पक्का मान बैठे थे कि अब लोकसभा का टिकट अनुपमा को मिलेगा। लेकिन फरवरी से रेणुका रावत यहां सक्रिय होने लगीं। लोगों से मिलने-जुलने के अलावा कार्यक्रमों के उद्घाटन और समापन में शामिल होने लगीं।
उनके सक्रिय होने पर लोगों में संदेश गया कि अब लोकसभा का टिकट इन्हें मिलेगा। अनुपमा युवा चेहरा हैं। लेकिन पार्टी ने युवा जोश के बजाए रेणुका के अनुभव को वरीयता दी। रेणुका इससे पहले अल्मोड़ा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं जबकि अनुपमा ने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा।
सत्ता बदलते ही दौड़ से बाहर हुए ब्रह्मस्वरूप
कभी हरिद्वार में हरीश रावत विरोधी खेमे के अगुवा माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी पिछले पांच साल से टिकट की लॉबिंग में जुटे थे।
हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनते ही ब्रह्मस्वरूप लोकसभा टिकट की दौड़ से बाहर हो गए थे। हालांकि इसके बाद ब्रह्मस्वरूप की ओर से संकेत आया था कि अब वह अपने आश्रम को हरीश रावत विरोधी गतिविधियों का केंद्र नहीं बनने देंगे।
राजेंद्र सिंह के नाम पर भी बनी थी सहमति
स्थानीय स्तर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. राजेंद्र सिंह के नाम पर भी सहमति बनी थी। जिले में कांग्रेस के अधिकतर नेताओं ने राजेंद्र सिंह को लोकसभा का टिकट देने पर हामी भर दी थी।
तब माना जा रहा था कि उनका टिकट तय हो गया है लेकिन राजेंद्र सिंह ने साफ कर दिया था कि अगर रावत परिवार से किसी को टिकट मिलता है तो वह दावेदारी नहीं करेंगे।