गंगोत्री हादसाः फोन की घंटी बता रही थी जिदंगी बची या मौत मिली
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गंगोत्री से दर्शन कर हरिद्वार लौट रहे इंदौर (मध्यप्रदेश) के 30 तीर्थयात्रियों में से 22 यात्री काल के ग्रास में समा गए। इसमें अभी चार यात्री लापता बताए जा रहे हैं। इस भीषण हादसे के बाद मध्यप्रदेश स्थित इंदौर के बेटमा में कुशवाह मोहल्ले के लोगों ने पूरी रात बैचेनी और रो-रोकर काटी।
इस मोहल्ले के जो यात्री 12 मई को बस में सवार होकर धार्मिक यात्रा पर निकले थे, उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आने के बाद मोहल्ले में मातम पसर गया। जो लोग हादसे का शिकार हुए हैं, उनमें से ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवार के हैं। कोई चाट का ठेला लगता है तो कोई फल बेचता है।
घायल और लापता होने वालों में ज्यादातर आपस में रिश्तेदार
बेटमा निवासी निर्भरसिंह चौधरी ने एक हिंदी न्यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा कि धार्मिक यात्रा की बुकिंग उन्होंने ही की थी। बड़ों के 16 से 20 हजार और बच्चों के 8 हजार रुपए यात्रा के लिए थे। शाम को जब खबर आई तो मोहल्ले के लोग थाने में जमा हो गए, क्योंकि उत्तरकाशी प्रशासन से भी सूचना थाने पर दी जा रही थी। थाने का फोन बरामदे में रखा था। जैसे ही फोन की घंटी बजती, भीड़ के बीच सन्नाटा पसर जाता।
बेटवा निवासी नंदकिशोर ने शाम 5 बजे ही मौसी सरजू बाई से मोबाइल पर बात की थी। सरजू ने बताया था कि उन्होंने गंगोत्री में स्नान कर लिया है और बुधवार को केदारनाथ के लिए रवाना होंगे, लेकिन ढाई घंटे बाद ही बस के खाई में गिरने की खबर आ गई। बस हादसे में घायल और लापता होने वालों में ज्यादातर आपस में रिश्तेदार हैं।
नालूपानी में जिस जगह हादसा हुआ, वह तीर्थयात्रियों के पड़ाव से मात्र एक किमी दूर थी। यात्रियों के रुकने की व्यवस्था नालूपानी के ज्ञानदीप होटल में की गई थी। यहां इन्हें विश्राम कर शाम का भोजन लेना था।