कोई नहीं उठा रहा पहाड़ की पीड़ा का बीड़ा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपदा को उत्तराखंड में बड़ा मुद्दा बताने वाले सियासी दल उसके मार्मिक पहलु पुनर्वास से कन्नी काटते रहे हैं।
बरस दर बरस पहाड़ों को झकझोरने वाली आपदा से दरक चुके सैंकड़ों गांव हर चुनाव से पहले सियासत का केंद्र बिंदू तो जरूर बनते हैं, लेकिन उनके पुनर्वास की थाह कोई नहीं लेता।
पहाड़ की पीड़ा सियासी भाषणों में तो जरूर झलकती है, लेकिन पुनर्वास की राह ताक रहे गांवों की सुध अब तक किसी ने नहीं ली।
337 गांवों का पुनर्वास बरसों से लटका
राज्य में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कुल 337 गांवों का पुनर्वास बरसों से लटका है जिसपर सिर्फ हर चुनाव दल सियासी मुद्दा बनाता रहा हैं।
हकीकत में अब तक भाजपा और कांग्रेस की प्रदेश में रही सरकारों ने किसी एक गांव का पुनर्वास नहीं किया। जून 16 के बाद राज्य में आई प्राकृतिक आपदा से 103 नए गांव जुड़े हैं जबकि उससे पहले 224 गांव बरसों से पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।
कार्ययोजना तैयार ही नहीं
गांवों के पुनर्वास के लिए सरकार ने धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है। आपदा के साय में गांवों में रहने को मजबूर जनता को आखिर बसाया कहां जाएगा इसकी कार्ययोजना तैयार ही नहीं हुई।,
पुनर्वास पर वोटों की राजनीति तो हो रही है लेकिन आपदा की मार झल रहे ग्रामीण आज भी भगवान भरोसे हैं।
पुनर्वास के दावों की खुल चुकी है पोल
जून 2013 में आई आपदा के बाद राज्य सरकार ने गांवों के पुनर्वास के लिए केंद्र से वित्तीय मदद मांगी।
योजना आयोग ने सरकार के पुनर्वास प्लान को इसलिए खारिज किया था क्योंकि उसमें यह तक स्पष्ट नहीं था कि पुनर्वास होगा कैसे।
बसाये जाने वाले गांवों के लिए भूमि तक चिन्हित नहीं थी। भूर्गीय सर्वेक्षण, मौजूदा आबादी की स्थिति जैसी कार्ययोजना सरकार नहीं दे पाई।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित ग्राम का पुनर्वास
जनपद - गांव
चमोली - 61
बागेश्वर - 42
पौड़ी - 26
अल्मोड़ा - 9
नैनीताल - 6
पिथौरागढ़ - 129
टिहरी - 27
उत्तरकाशी - 8
रुद्रप्रयाग - 16
देहरादून - 2
यूएस नगर - 1
चंपावत - 10
हरिद्वार - 0
खतरे के साए में हैं 103 गांव
यहां पहाड़ अधिक संवेदनशील हैं, जहां 103 गांव चिन्हित किये गए हैं। पुनर्वास तो दूर अभी भू गर्भीय रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हुई। जिन्हें हटाया भी गया उनके लिए भी स्थाई पुनर्वास का विकल्प देने के बजाए किराये के मकानों में ठहराया गया है।
चमोली - 12
पौड़ी - 7
पिथौरागढ़ - 58
टिहरी - 8
उत्तरकाशी - 2
रुद्रप्रयाग - 15
चंपावत - 1