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नहीं सुलझी रेप-कत्ल की मिस्ट्री, हादसे से टूटे पिता का लाडो के लिए इस तरह छलका दर्द..
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पथरी/ हरिद्वार
Updated Sat, 30 Dec 2017 07:48 PM IST
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चार साल बीतने को हैं लेकिन बेटी को इंसाफ नहीं मिल सका। पिता भी अब बेटी को इंसाफ मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ ही चुके हैं।
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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई भी अभी तक रेप-कत्ल की मिस्ट्री सुलझ नहीं सकी। जांच अभी भी पाइप लाइन में ही है। हरिद्वार-लक्सर मार्ग के एक गांव की रहने वाली सातवीं की छात्रा की 7 जनवरी 2014 में रेप के बाद कत्ल करने की घटना आज भी हर किसी के जेहन में है।
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रोशनाबाद क्षेत्र के एक आवासीय विद्यालय की होनहार छात्रा के कत्ल ने पूरे प्रदेश के सिस्टम को हिलाकर रख दिया था। तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा और डीजीपी तक को घटनास्थल पर पहुंचना पड़ा था। मामले का खुलासा करने में जब लोकल पुलिस विफल रही तो केस की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी सीबीआई को दे दी गई।
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डीएनए टेस्ट, मैनुअल पुलिसिंग, कड़ी पूछताछ, इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से लेकर हर पहलू की राह लोकल पुलिस ने पकड़ी थी पर नतीजा सिफर रहा था। सीबीआई भी कई साल से पेचीदा हो चुकी गुत्थी को सुलझाने में एक्सरसाइज कर रही है।
जानिए क्या कहा पिता ने अपनी लाडो को लेकर...
रूंधे गले से पिता बोले कि बेटी को इंसाफ नहीं मिला
कोर्ट
बेटी को इंजीनियर बनाने का ख्वाब पाले बैठे पिता की आंखों से अश्रुधारा बह उठती है। वे बोलते हैं कि सीबीआई से भी उम्मीद कम दिखाई दे रही है। रूंधे गले से पिता बोले कि बेटी को इंसाफ नहीं मिला, यह दर्द ताउम्र सालता रहेगा। सीबीआई ने भी इस साल अक्तूबर के बाद संपर्क नहीं किया है।
भैंसा बुग्गी चलाने वाले की बेटी की हत्या के बाद पूरा गांव ही लोकल पुलिस के रडार पर आ गया था। पुलिस की चुस्ती फुर्ती के चलते पीड़ित परिवार को मानो सामाजिक बहिष्कार ही हो गया था। गांव के हर दूसरे युवा और अधेड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। इसलिए कोई भी परिवार के आसपास भी नहीं फटकता था। अब चार साल गुजरने को है तो गांववाले एक बार फिर से परिवार से घुल मिल रहे है।
भैंसा बुग्गी चलाने वाले की बेटी की हत्या के बाद पूरा गांव ही लोकल पुलिस के रडार पर आ गया था। पुलिस की चुस्ती फुर्ती के चलते पीड़ित परिवार को मानो सामाजिक बहिष्कार ही हो गया था। गांव के हर दूसरे युवा और अधेड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। इसलिए कोई भी परिवार के आसपास भी नहीं फटकता था। अब चार साल गुजरने को है तो गांववाले एक बार फिर से परिवार से घुल मिल रहे है।