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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Rampur Tiraha firing case 27 years: Uttarakhand Andolankari Not Forget that Horrible night till now

रामपुर तिराहा कांड: गिरती लाशें, लहूलुहान लोग... आंदोलनकारी बोले- वो रात याद कर बैठ जाता है दिल

Fri, 01 Oct 2021 10:37 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 01 Oct 2021 10:37 PM IST
सार

Rampur Tiraha firing case: राज्य आंदोलन के रामपुर तिराहा कांड बरसी पर शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फनगर शहीद स्थल पर जाकर शहीदों को श्रद्धाजंलि देंगे। 

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Rampur Tiraha firing case 27 years: Uttarakhand Andolankari Not Forget that Horrible night till now
रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक अक्तूबर रात के लगभग दस बजे देहरादून के दर्शनलाल चौक से लगभग दो-ढाई सौ बसों का हमारा काफिला निकला। हमारी माताएं-बहनें जो हमारे साथ नहीं जा रही थी, उन्होंने हमें तिलक लगाकर उत्साह से विदा किया। किसी को आभास भी नहीं था कि कुछ ही क्षणों में हमारा सामना खौफनाक मंजर से होगा। रामपुर तिराहा पहुंचते ही गोलियों की आवाज आई। हमारे सामने लाशें गिरीं, खून से लथपथ पड़े लोग, जलती गाड़ियां... हमारी आंखों से बस आंसू बह रहे थे। थोड़ी देर बाद महिलाओं के साथ बदसलूकी की खबरें मिलीं। दिल बैठ सा गया। यह कहना है वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी ओमी उनियाल का।

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रामपुर तिराहा कांड की काली रात को याद करते हुए ओमी उनियाल ने बताया कि मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड से दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने रोक दिया था। उसके बाद लोगों पर लाठियां बरसाई गईं। ओमी उनियाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के लिए यह दिन काला दिन है। राज्य निर्माण की इस लड़ाई में जब वह कूदे तो उनकी उम्र 30 साल थी। उस रात मैं और मेरे साथी स्व. रंजीत सिंह वर्मा, स्व. वेद उनियाल, शंकर चंद रमोला, रविंद्र जुगरान थे। हमारे ड्राइवर को पहले बुरी तरह पीटा गया और फिर हम पर बंदूक तानी गई। सबसे ज्यादा दुखद हमारे लिए हमारी मां-बहनों के साथ बदसलूकी थी। 
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बतौर जगमोहन नेगी सुबह लगभग पांच बजे जब रामुपर तिराहा पहुंचे तो वहां का भयानक मंजर देख हमारे हाथ-पांव फूल गए। हमारी मां-बहनों ने क्या कुछ खोया इसकी पीड़ा केवल वही समझ सकती हैं। जिस राज्य के लिए महिलाओं ने इतनी पीड़ा झेली, कई लोगों ने अपने परिवार खोए, किसी के घर का चिराग बुझ गया उन्हीं की अनदेखी आज इस राज्य में हो रही है।

भावुकता के साथ ओमी उनियाल व जगमोहन नेगी ने कहा कि राज्य पाने के बाद भी हमने कुछ नहीं पाया। आज भी उन महिलाओं को इंसाफ नहीं मिल सका। उनके गुनहगारों को सजा नहीं मिल सकी और शहीदों व आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन सका।

सीएम जाएंगे शहीद स्थल
राज्य आंदोलन के रामपुर तिराहा कांड बरसी पर शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फनगर शहीद स्थल पर जाकर शहीदों को श्रद्धाजंलि देंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के शहीदों का भावपूर्ण स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरनगर कांड (रामपुर तिराहा) की बरसी की पूर्व संध्या पर जारी संदेश में कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों की शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा। राज्य को देश का आदर्श राज्य बनाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना है। जिससे आंदोलन के शहीदों के सपनों को साकार किया जा सके। सरकार राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए कृतसंकल्प है।

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