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नहीं बनना जटायु-जामवंत, राम बनाओ तो करें रामलीला

Sat, 27 Sep 2014 09:54 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 27 Sep 2014 09:54 AM IST
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ramleela in uttarakhand

न वे स्टार हैं, न कोई सुपर स्टार। अभिनय भी साल भर में एक बार रामलीला में करते हैं। मगर रोल वही चाहिए जो देर तक स्टेज पर नजर आए।

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राम, लक्ष्मण, हनुमान और रावण बनने के लिए लाइन लग जाती है, लेकिन जटायु, जामवंत और नल-नील खोजने पर भी नहीं मिलते।

इसे प्रसिद्धि पाने की चाह कहें या अभिनय दिखाने की भूख, कलाकार रामलीलाओं में छोटे किरदार निभाने से कतरा रहे हैं।

इन दिनों कुछ ऐसी ही मुश्किलों से जूझ रही हैं रामलीला आयोजक कमेटियां। उनके मुताबिक बड़े रोल के लिए कलाकारों में मारामारी की नौबत है तो छोटे रोल के लिए मानमनौव्वल करनी पड़ रही है।

किस रोल की डिमांड

ramleela in uttarakhand

इन दिनों शहरभर में जगह-जगह रामलीलाएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें कई जगह बाहरी कलाकार अभिनय कर रहे हैं तो कुछ जगहों पर स्थानीय कलाकार भूमिकाएं अदा कर रहे हैं।

बाहरी कलाकार जहां पारिश्रमिक लेते हैं, जबकि स्थानीय कलाकार सेवाएं मुफ्त में देते हैं। हां, अभिनय के लिए रोल पर च्वाइस जरूर रखते हैं। स्थानीय कलाकार रामलीला के दौरान अधिकांश वक्त स्टेज पर नजर आना चाहते हैं।

ऐसे में वे राम, लक्ष्मण, हनुमान, मेघनाद, रावण आदि पात्र निभाना चाहते हैं। मगर जटायू, जामवंत, नल-नील, अक्षय कुमार, खर-दूषण, मारीच जैसे कुछ मिनटों के रोल बिल्कुल नहीं चाहते।

श्री आदर्श रामलीला कमेटी अध्यक्ष संत राम शर्मा ने बताया कि जटायु बनाने के लिए कलाकार को पक्षी रूप में सजाया जाता है, चोच लगा दी जाती है।

इसके बाद उसकी शक्ल नजर नहीं आती। जामवंत बनने वाला पात्र भी नजर नहीं आता। यही वजह है कि कलाकार ऐसी भूमिकाएं करने से मना कर देते हैं। साफ कहते हैं कि जब शक्ल ही नजर नहीं आएंगी तो भला क्यों मंच पर जाएं।

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महिला किरदारों को साफ इनकार

ramleela in uttarakhand

स्थानीय कलाकार महिला पात्रों सुपर्णखा, मंदोदरी आदि निभाने से मना कर देते हैं। ऐसे में अधिकतर जगह यह भूमिकाएं महिला ही निभाती हैं।

रामलीला बाजार में होने वाली रामलीला में मथुरा के पुरुष कलाकार महिला पात्र निभाते हैं। कलाकार सोनू शर्मा के मुताबिक उन्हें माता सीता की भूमिका निभाना बेहद अच्छा लगता है। मथुरा के ठाकुर लाल भारद्वाज ने बताया कि उनके यहां महिला किरदार पुरुष निभाते हैं।

हनुमान, कुंभकरण की सेना के लिए क्रेज
रामलीला में अशोक वाटिका विध्वंस और कुंभकरण को जगाने जैसे कुछ वक्त के दृश्यों के लिए बच्चों में खासा क्रेज है। कुंभकरण जगाने के लिए मदिरा के तौर पर कोल्ड ड्रिंक दी जाती है। पकौडे़ तैयार किए जाते हैं। सेवक बने बच्चे खाने-पीने का खूब लुत्फ उठाते हैं। अशोक वाटिका में हनुमान के साथ बच्चे फल तोड़कर खूब खाते और उछलकूद करते हैं।

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