रामदेव ने मुस्लिम और ईसाईयों को दिया योग का नया 'फॉर्मूला'
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बाबा रामदेव ने कहा कि ओंकार के उच्चारण और 12 आसनों को मिलाकर बने सूर्य नमस्कार पर विवाद उठाना गलत है। जो लोग ओंकार का उच्चारण व सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहते वह अन्य आसन जरूर करें।
योग में इन दोनों की बाध्यता कभी नहीं रही। लेकिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कोई विवाद न उठाएं।
मुस्लिम अल्लाह, ईसाई यीशु के नाम के साथ करें
बुधवार को हुई वार्ता में बाबा रामदेव ने कहा कि हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि जो साधक योग करते समय प्रणव ध्वनि के बजाय अपने ईष्ट के नाम का प्रयोग करना चाहे वह इसके लिए स्वतंत्र हैं।
ओम उच्चारण के बजाय मुसलमान उसी तरह सांस खींचते हुए अल्लाह का उच्चारण कर सकते हैं। यीशु का उच्चारण ईसाई करें तो किसी को एतराज नहीं होना चाहिए।
योग दिवस पर सूर्य नमस्कार की बाध्यता नहीं
बाबा रामदेव ने आगे कहा योग जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं। लंबे समय बाद योग को अंतरराष्ट्रीय जगत में सम्मान मिला है। इस दिवस को उल्लास के साथ गली-गली मनाना चाहिए।
बाबा रामदेव ने कहा कि सूर्य नमस्कार आमतौर पर शिविरों में भी नहीं कराया जाता। जो लोग सीखना चाहें उनके लिए व्यवस्था की जाती है। सूर्य प्रणाम वास्तव में कोई आराधना नहीं। इसे करने से मनुष्य का सर्वांग पुष्ट होता है।
कहीं भी सूर्य नमस्कार की बाध्यता 21 जून को नहीं रहेगी। बाबा ने कहा कि विश्व योग दिवस के रूप में हमारी प्राचीनतम विधाओं को मान मिल रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि देश की जनता इस दिन को योगमय बनाएं।