राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपनाएगी यह रास्ता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सियासी पंडित भी मानते हैं कि मौजूदा अंकगणित के मुताबिक कांग्रेस को राज्यसभा की सीट जीतने में तो ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी लेकिन ज्यादा घमासान उम्मीदवारी को लेकर है।
इस दौड़ में कुनबे के कई घरेलू महत्वाकांक्षी तो शामिल हैं ही, हाईकमान की ओर से किसी बाहरी को एडजस्ट करने की खबर भी आ रही है। इससे पार्टी में अंदरूनी कुलबुलाहट बढ़ गई है। बाहरियों को बाहर करने की मांग भी उठने लगी है।
उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने दो नवंबर को दिल्ली में बैठक बुलाई है। उम्मीद है कांग्रेस इसी दिन अपने उम्मीदवार का नाम भी घोषित कर देगी।
सूत्रों मानें तो अभिनेता और नेता राजबब्बर और लोकसभा चुनाव में प्रभारी रहे राजीव शुक्ला के नाम भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। गुलाम नबी आजाद का नाम भी सामने आया था लेकिन जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव घोषित होने के बाद ऐसा मुश्किल होगा।
उम्मीदवारी को लेकर एक राय बनाना मुश्किल
दूसरी ओर, राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी ठोंकने वाले धीरेंद्र प्रताप का कहना है कि पार्टी को यह सीट राज्य के ही नेताओं को देनी चाहिए। उनका कहना है कि पूर्व में भी संघप्रिय गौतम, सुषमा स्वराज, सतीश शर्मा और सत्यब्रत चतुर्वेदी जैसे बाहरी नेताओं को यहां से मौका दिया गया।
प्रदेश की चिंता नहीं
जिन्होंने कार्यकाल तो पूरा किया लेकिन प्रदेश की चिंता नहीं की। ऐसे में पार्टी को राज्य आंदोलन से जुड़े नेता को ही उम्मीदवारी सौंपनी चाहिए जो राज्य की जमीनी हकीकत जानता हो।
कांग्रेस में राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर एक राय बनाना मुश्किलों भरा है। विजय बहुगुणा अपनी उम्मीदवारी को लेकर फिर सक्रिय हो गए हैं। सीएम पद छोड़ने के बाद से बहुगुणा सितारगंज विधानसभा से इस्तीफा दे राज्यसभा की उम्मीदवारी चाह रहे हैं।
सीएम हरीश रावत का खेमा शुरू से ही उनकी दलील को खारिज कर उन्हें सितारगंज विधानसभा नहीं छोड़ने दे रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने हाल ही दलित और अल्पसंख्यक उम्मीदवारी की बात उठाकर बहुगुणा की राह की मुश्किलें और बढ़ा दी है।