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उत्तराखंड के राजेंद्र सिंह के हाथ कोस्ट गार्ड के नए डीजी की कमान
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Feb 2016 08:43 PM IST
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देहरादून जिले के चकराता निवासी राजेंद्र सिंह को
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भारतीय तटरक्षक (कोस्ट गार्ड) की कमान सौंपी गई है। उन्हें कोस्ट गार्ड का
नया डीजी नियुक्त किया गया है। गढ़वाल यूनिवर्सिटी से स्नातक राजेंद्र सिंह
वर्तमान में अपर महानिदेशक के पद पर नियुक्त हैं।
भारतीय तटरक्षक की विकास यात्रा के साक्षी रहे राजेंद्र सिंह की स्कूल शिक्षा मसूरी से हुई, जिसके बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद कोस्टगार्ड को ज्वाइन किया। उन्हें भारतीय तटरक्षक में शमिल हर प्रकार के पोत चाहे वह अन्तरोर्धी नौका, उपतटीय गश्ती पोत, तीव्र गश्ती पोत, अपतटीय गश्ती पोत, अत्याधुनिक अपतटीय गश्ती पोत सभी की कमान हासिल करने का सौभाग्य मिला है। महानिरीक्षक के रूप में भारतीय समुद्र तट के पूरे पूर्वी तट एवं अविभाजित पश्चिमी तट का कमान संभाला है।
2007 में मिल चुका है राष्ट्रपति पदक
15 अगस्त, 2007 को उन्हे उल्लेखनीय सेवाओं के राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया। 34 वर्ष के कैरियर में अहम पदों पर सेवाएं देने के उन्होंने भारतीय तटरक्षक पोत संग्राम को सुदूरपूर्व जापान, फिलीपीन्स और वियतनाम में भेजा। 26/11 की मुंबई घटना के बाद भारतीय तटरक्षक की जिम्मेदारी कई गुंना बढ़ गई। तटरक्षक मुख्यालय में अपर महानिदेशक राजेंद्र सिंह इन सभी क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे है। उनके परिवार में उनकी पत्नी उर्मिला एवं उनकी दो बेटियां हैं।
तस्करी रोकने का है कीर्तिमान
अस्सी के दशक में जब भारतीय समुद्री सीमा में तस्करी अपने चरम पर थी और राष्ट्र के चिंता का विषय था, उस समय राजेंद्र सिंह ने तस्कर विरोधी कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाई। तस्करी का सामान जब्त करने का कीर्तिमान उनके नाम है जिसके लिए 15 अगस्त, 1990 को राष्ट्रपति तटरक्षक पदक से सम्मानित किया।
भारतीय तटरक्षक की विकास यात्रा के साक्षी रहे राजेंद्र सिंह की स्कूल शिक्षा मसूरी से हुई, जिसके बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद कोस्टगार्ड को ज्वाइन किया। उन्हें भारतीय तटरक्षक में शमिल हर प्रकार के पोत चाहे वह अन्तरोर्धी नौका, उपतटीय गश्ती पोत, तीव्र गश्ती पोत, अपतटीय गश्ती पोत, अत्याधुनिक अपतटीय गश्ती पोत सभी की कमान हासिल करने का सौभाग्य मिला है। महानिरीक्षक के रूप में भारतीय समुद्र तट के पूरे पूर्वी तट एवं अविभाजित पश्चिमी तट का कमान संभाला है।
2007 में मिल चुका है राष्ट्रपति पदक
15 अगस्त, 2007 को उन्हे उल्लेखनीय सेवाओं के राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया। 34 वर्ष के कैरियर में अहम पदों पर सेवाएं देने के उन्होंने भारतीय तटरक्षक पोत संग्राम को सुदूरपूर्व जापान, फिलीपीन्स और वियतनाम में भेजा। 26/11 की मुंबई घटना के बाद भारतीय तटरक्षक की जिम्मेदारी कई गुंना बढ़ गई। तटरक्षक मुख्यालय में अपर महानिदेशक राजेंद्र सिंह इन सभी क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे है। उनके परिवार में उनकी पत्नी उर्मिला एवं उनकी दो बेटियां हैं।
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तस्करी रोकने का है कीर्तिमान
अस्सी के दशक में जब भारतीय समुद्री सीमा में तस्करी अपने चरम पर थी और राष्ट्र के चिंता का विषय था, उस समय राजेंद्र सिंह ने तस्कर विरोधी कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाई। तस्करी का सामान जब्त करने का कीर्तिमान उनके नाम है जिसके लिए 15 अगस्त, 1990 को राष्ट्रपति तटरक्षक पदक से सम्मानित किया।
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