किसानों को खाने से लेकर इलाज तक के लाले
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बेमौसमी बारिश ने फसलों को इस कदर तबाह किया है कि किसानों के सामने अपनी जरूरतें तक पूरी करने का संकट पैदा हो गया है।
बच्चों की स्कूली फीस, बैंक और साहूकार का कर्ज चुकाने से लेकर साल भर भोजन जुटाने की फिक्र ने जिंदगी पर गहरा फर्क डाला है। कई किसानों के सामने मजदूरी करने के हालत पैदा हो गए हैं। कइयों के लिए बीमारी का इलाज कराना मुश्किल हो गया है। कइयों के सपने बारिश के कारण गिरी फसल के नीचे दबकर काले हो गए हैं...।
अलग कमरे का सपना टूटा
उत्तराखंड के माजरीग्रांट के बुजुर्ग किसान बलवंत सिंह के पास पांच बीघा जमीन है। इसी पर खेती करके वह अपने 12 सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं। उन्हें इस बार करीब 20 कुंतल गेहूं पैदा होने की उम्मीद थी।
अब दस कुंतल गेहूं पैदा होने की उम्मीद नहीं है। परिवार के लिए खाने भर का गेहूं रखकर बाकी बेचकर वह बेटे के लिए अलग कमरा बनवाना चाहते थे। लेकिन बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल काली पड़ गई है। बताया कि वर्षों बाद ऐसी स्थिति आई है। खेत में फसल की बर्बादी देखकर आंखों में आंसू आ जाते हैं।
बारिश ने बना दिया मजदूर
शेरगढ़ निवासी शेर सिंह और उनके भाई का परिवार चार बीघा जमीन से होने वाली पैदावार पर निर्भर है। बेटी की शादी का मन बनाकर उन्होंने इस बार अगेती गेहूं की फसल बोई थी। खेतों फसल अच्छी तरह से तैयार भी हो रही थी लेकिन इसी बीच बेमौसमी बारिश ने सब बर्बाद कर दिया।
उनके सामने अब खाद्यान्न तक का संकट पैदा हो गया है। बताया कि अब तो जरूरत का सामान भी खरीदने में दिक्कतें आएंगी। बच्चों की स्कूल की फीस, बिजली और पानी का बिल आदि कैसे दे पाएंगे? कोई अचानक बीमार पड़ गया तो क्या करेंगे? भरे गले से कहते हैं कि लगता है कि मजदूरी करके पेट पालना पड़ेगा।
कैसे चुकाएंगे बैंक का कर्ज?
मारखमग्रांट कुड़कावाला के युवा निर्भय सिंह ने पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती करके जिंदगी गुजारने का फैसला किया था, लेकिन इस साल हुई बेमौसमी बारिश ने उनके हौसले को तोड़ दिया है।
करीब 40 बीघा जमीन पर कृषि कार्य करने वाले निर्भय ने किसान क्रेडिट कार्ड से दो लाख रुपए का कर्ज लेकर बुवाई की थी। पैदावार से परिवार को स्थिति में सुधार लाने के अलावा नया ट्रैक्टर खरीदने का मन बनाया था। लेकिन अब बैंक का कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है। अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए खाद और बीज का प्रबंध करना भी चुनौती होगा।
मुआवजा मिलने का इंतजार
बारिश से फसलों को नुकसान पर प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाना है। कृषि और भूमि संरक्षण अधिकारी कैलास बहुगुणा ने बताया कि क्षति की रिपोर्ट भेजने के बाद विभाग नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार कर मुआवजा राशि तय करेगा।
मुआवजा राशि तय करने के लिए एक वर्ग मीटर को पैमाना बनाया गया है। इस कार्य में किसानों के साथ ही राजस्व विभाग भी शामिल होंगे। मुआवजा आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।
देहरादून जिले में 61 फीसदी फसल बर्बाद
उत्तराखंड में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बारिश से दून जिले में 61 फीसदी फसल खराब हुई है। इससे करीब 56 करोड़ 14 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। देहरादून सहित प्रदेशभर में दो लाख तीन हजार 45 हेक्टेयर फसल खराब हुई है।
अपर निदेशक कृषि पवन कुमार ने बताया कि जिलों से आई रिपोर्ट के आधार पर बीते मार्च और अप्रैल माह में अब तक हुई बारिश से नुकसान का आकलन किया गया है। किसानों को सहायता राहत राशि के साथ ही खरीफ का निशुल्क बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
बारिश से सबसे अधिक नुकसान हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हुआ है। हरिद्वार में 69 एवं ऊधमसिंह नगर में 63 फीसदी फसल बर्बाद हुई है। प्रदेशभर में गेहूं और जौ का एक लाख 87 हजार 917 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है।
गेहूं और जौ की 73 फीसदी, चना-मटर और मसूर की 57 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। गेहूं और जौ का 612.19 करोड़ और चना, मटर व मसूर का 22.10 करोड़ का नुकसान हुआ है। अन्य जनपदों चमोली, अल्मोड़ा, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग में भी काफी नुकसान हुआ है।
57 फीसदी फसल बर्बाद
डोईवाला विकासखंड में हुए कृषि के नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने वाले कृषि और भूमि संरक्षण अधिकारी कैलास बहुगुणा बताते हैं कि ब्लॉक के डोईवाला ब्लाक में बेमौसम बारिश से लगभग 57 प्रतिशत फसल बेकार हो गई है।
भोगपुर और समीपवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली मसूर की खेती को बरसात से 68 प्रतिशत, सरसों को 65, चना को 67 और गेहूं की फसल लगभग 60 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। सब्जियों में भिंडी, फलों में आम और लीची को भी नुकसान हुआ है।
किसानों को राहत देने की तैयारी
बेमौसमी बारिश से फसल का नुकसान उठा चुके किसानों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार कुछ और कवायद कर रही है। तत्काल राहत के लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। बचत कर किसानों तक राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अतिथि खर्च में भी कटौती की जा रही है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से भी इस संबंध में बात की। केंद्रीय मंत्री से एक वर्ष के लिए किसानों से वसूली स्थगित करने का आग्रह किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने व्यावसायिक बैंकों से कर्ज पर ब्याज माफी के लिए कोशिश करने और मुद्दे को वित्त मंत्री के सामने रखने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक उद्यान और कृषि को दो दिन में साढ़े पांच करोड़ रुपए दे दिए जाएंगे।अपर मुख्य सचिव एस राजु और सचिव उच्च शिक्षा को ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की फीस का आंकड़ा एकत्र करने को कहा गया है। ताकि फीस माफी पर विचार हो सके। किसानों की मदद के लिए धन उपलब्ध कराने की खातिर सरकार अपने खर्च में भी कमी करेगी।
साफ निर्देश दे दिया गया है कि किसी बाहरी मेहमान के न होने पर भोज आदि में साधारण खाना परोसा जाए। मुख्यमंत्री आवास पर चाय पानी के खर्च में भी कमी की जाए। मेलों आदि को दी जाने वाली सरकारी सहायता भी आधी कर दी जाए।
इन खर्चों से बचत कर मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच करोड़ रुपए की राशि किसानों को राहत देने के लिए दी जाएगी। इसके अलावा किसानों को हल्दी और अदरक का बीज 75 प्रतिशत केवल इस वर्ष के लिए अनुदान पर दिया जाएगा। मिनी किट भी निशुल्क दिए जाएंगे।