Uttarakhand: रेडॉन गैस पहले ही दे देती है, भूकंप आने का संकेत, वाडिया इंस्टीट्यूट के अध्ययन में सामने आई बात
रेडॉन गैस पहले ही भूकंप आने का संकेत दे देती है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। भूकंप का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में वैज्ञानिक अच्छा संकेत मान रहे हैं।
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चट्टान और मिट्टी से निकलने वाली रेडाॅन-222 गैस की मात्रा में बदलाव आता है, तो उसके कुछ दिन बाद भूकंप आया है। यह जानकारी वाडिया हिमालय भूवैज्ञानिक संस्थान के गढ़वाल क्षेत्र में अध्ययन में सामने आई है। वैज्ञानिक इस अध्ययन को भूकंप का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में एक अच्छा संकेत मान रहे हैं।
अभी तक भूकंप का पूर्वानुमान लगाने की प्रभावी तकनीकी विकसित नहीं हो सकी है। भूकंप आने की दशा में उसके प्रभावों को कैसे कम किया जाए, इसको लेकर कार्य हो रहा है। वाडिया संस्थान काफी समय से भूकंप को लेकर अध्ययन कर रहा है। इसके अंतर्गत ही गुत्तू (टिहरी) में वाडिया की लैब है। यहां पर करीब दो दशक से अध्ययन का काम चल रहा है।
भूकंप की तीव्रत रिक्टर स्केल पर तीन से चार तक
संस्थान के सिस्मोलॉजी विभाग के प्रभारी वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि कि चट्टान और मिट्टी से रेडॉन गैस निकलती है। एआई के मदद से यहां के रेडॉन गैस के डाटा (दस साल) का विश्लेषण एक मॉडल के जरिए किया गया। इससे पता चला कि अगर रेडॉन गैस उत्सर्जन की मात्रा सामान्य तौर से अधिक या ज्यादा हुई तो उसके पांच से सात दिन के बाद भूकंप रिपोर्ट हुआ है। यह भूकंप रिक्टर स्केल पर तीन से चार तक की तीव्रता के थे।
वैज्ञानिक नरेश ने बताया कि यह एक महत्वपूर्ण जानकारी है, यह भूकंप का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में मददगार हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार संवेदनशील जगहों पर रेडॉन गैस के उत्सर्जन की निगरानी करते हुए यह कार्य किया जा सकता है। इस अध्ययन में वैज्ञानिक वंदना, प्रियदर्शी चिन्मय कुमार, संजय कुमार वर्मा शामिल रहे। इससे जुड़ा रिसर्च पेपर जर्नल आफ रेडियोनलिटिकल एंड न्यूक्लियर केमेस्ट्री में प्रकाशित हुआ है।
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राज्य में पिछले महीने दो भूकंप आए
देहरादून। देश में पिछले महीने 64 भूकंप रिपोर्ट हुए थे। इसमें दो भूकंप राज्य में आए थे। 1975 से 2024 तक राज्य में 447 भूकंप आए हैं। इसमें अधिकांश भूकंप 3 से 4 की तीव्रता के रहे। पिछले वर्ष भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया था। इसमें उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन छह में रखा था।