इस मंदिर पर जिसने भी डाली गलत निगाह, वो मारा गया!
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कनखल में गंगा किनारे स्थित राधाकृष्ण का मंदिर अद्भुत है। इस मंदिर का स्वामी कोई धरती वासी नहीं, अपितु साक्षात भगवान ही हैं।
मुरलीमनोहर और राधारानी जिस मंदिर के मालिक हो, भला उस पर कोई गलत निगाह डाल सकता है। हुआ ऐसा ही है। पर कमाल देखिए कि जिसने भी गलत निगाह डाली उसी ने खता खाई।
भगवान राधाकृष्ण का मंदिर वास्तव में किसने बनवाया कोई नहीं जानता। इसे कईं राजाओं से जोड़ा गया है। बाद में राजा की एक बांदी इस मंदिर की पूजा-अर्चना करती रही। चूंकि मंदिर से सटा एक विशाल बाग भी नगर के बीचों-बीच स्थित है, अत: भूमाफियाओं की निगाहें मंदिर पर अनेक बार लगीं।
तमाशा यह कि जिसने भी मंदिर पर कब्जा कर बेचना चाहा, वह बर्बाद हो गया। हाल ही में सुधीर गिरी हत्याकांड में पकड़े गए आशीष टुल्ली ने भी मंदिर का बाग कटवाकर भूमि बेचने की कोशिश की थी। हश्र सामने हैं।
जिसने भी नजर डाली उसने ही खता खाई
बांदी के बाद एक पंडित ने जमीन हड़पकर बेचने की कोशिश की और गोली का शिकार हो गया। पुलिस की शह पर कुछ लोगों ने सेवक पूरणलाल को निकाल कर मंदिर बेचना चाहा, एक-एक कर सभी दुर्घटना का शिकार हुए।
एक व्यवसायी ने मंदिर कब्जाया तो सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। कांग्रेस के बड़े नेता मंदिर और भूमि बेचने के चक्कर में आए तो राजनीति में दोबारा वापस न लौट सके। एक नेता दलाली में शामिल हुए तो बुरी तरह बीमार पड़ गए और बहुत कुछ खोना पड़ा।
एक महिला और कांग्रेस के एक अन्य नेता ने जैसे ही मंदिर की रजिस्ट्री करनी चाही, महिला चल बसी और नेता अनाम जिंदगी जीने को विवश हो गए।
आज तक भी कोई कनखल के राधाकृष्ण मंदिर को बेच न पाया। आखिर मंदिर और भूमि के मालिक वाले खाने में स्वयं राधाकृष्ण विराजमान जो हैं।