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शवों की शिनाख्त का ये तरीका कर देगा हैरान

Tue, 03 Dec 2013 11:44 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Dec 2013 11:44 AM IST
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questioning on dehradun police procedural

शुभम देवरानी के केस ने देहरादून पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस केस में पुलिस ने सर्तकता नहीं दिखाई और शुभम के परिजन उसका अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए।

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खासकर अज्ञात शवों की शिनाख्त का तरीका हैरान करने वाला है। पुलिस 72 घंटे का इंतजार करने के बाद शव को ठिकाने लगा देती है। ऐसा शायद जांच-पड़ताल के झंझट से बचने के लिए किया जाता है।
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पुसिल की जांच पर सवाल

ऐसे में तमाम लोग मौत का शिकार होने वाले अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाते। कुछ ऐसा ही जहरखुरान के हाथों जान गंवाने वाले बीबीए छात्र शुभम के परिजनों के साथ हुआ।

एक ओर शुभम परिजन उसकी तलाश में दर-दर भटकते रहे थे, तो उधर बरेली पुलिस ने अज्ञात बताकर उनके लाडले का अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में दून पुलिस ने भी गजब की लापरवाही दिखाई।

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मीडिया से शव मिलने की सूचना मिल चुकी थी, लेकिन दून पुलिस ने संबंधित थाने से इसकी तस्दीक करना उचित नहीं समझा। जबकि दून पुलिस और एसओजी की टीमें उस समय बरेली के आसपास मौजूद थीं।


शिनाख्त का तरीका
डीआईजी (सीआईडी) जीएस मर्तोलिया के अनुसार शव मिलने पर पुलिस पहले आसपास के लोगों से शिनाख्त की कोशिश करती है। समीपवर्ती जिलों, प्रदेशों की पुलिस को वायरलेस सेट के माध्यम से सूचना दी जाती है।

गुमशुदा हुए व्यक्ति का ब्यौरा मंगाया जाता है। इस बीच निर्धारित 72 घंटे का वक्त बीतने पर शव अंतिम संस्कार कर दिया जाता है।

फिर पुलिस नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) समेत सभी राज्यों को शव का हुलिया, फोटो, पहचान के चिह्न, बरामद सामान आदि का ब्यौरा देने के लिए पत्रों का सिलसिला चलता रहता है। गंभीर लगने वाले मामलों में डीएनए सुरक्षित रखा जाता है।

हाईटेक संसाधनों का हो इस्तेमाल
लावारिस शवों की शिनाख्त करने और उन्हें परिजनों तक पहुंचाने के लिए संवेदनशीलता के साथ ही हाईटेक संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत है।

थाना पुलिस को अज्ञात शव की पहचान से संबंधित जानकारी एनसीआरबी या राज्य की वेबसाइट पर गुमशुदा ऑप्शन के तहत लगातार अपडेट करनी चाहिए। पुलिस को इस ऑप्शन पर नजर रखकर तालमेल बनाना चाहिए।

जब अज्ञात शव कुख्यात का निकला
30 अक्तूबर 2007 को मणिमाईं मंदिर के पास अधजला शव मिला था। अगर दिल्ली क्राइम ब्रांच दो बदमाशों को नहीं पकड़ती तो शायद इस रहस्य पर भी पर्दा पड़ा रहता।

शव वेस्ट यूपी के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर दिनेश त्यागी का था। फिरौती की रकम को लेकर दोनों बदमाशों ने दिनेश त्यागी की हत्या की थी।

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