फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Question on the reliability of sex ratio data

लिंगानुपात के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल

Fri, 27 Sep 2019 02:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2019 02:00 AM IST
विज्ञापन
Question on the reliability of sex ratio data
देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में दो दिवसीय पीसी पीएनडीटी पर आयोजित कार्यशाला में मौजू?
देहरादून। पीसी पीएनडीटी (प्री कनस्पेशन एंड प्री नटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट) एक्ट के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक में विशेषज्ञों ने लिंगानुपात के विभिन्न आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। सात राज्यों की इस समीक्षा बैठक में उत्तराखंड के अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने इन आंकड़ों के सत्यापन पर जोर दिया। जबकि राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. साबू जॉर्ज ने उत्तरकाशी जिले के लिंगानुपात आंकड़ों को गलत बताया। कहा कि जिले की वास्तविक तस्वीर नीति निर्माताओं के सामने आनी चाहिए।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार को हरिद्वार बाईपास स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यशाला में उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और पश्चिम बंगाल के अधिकारी पहुंचे। जबकि, हिमाचल प्रदेश से कोई नहीं पहुंचा। इस दौरान एनएचएम निदेशक एवं अपर सचिव स्वास्थ्य जुगल किशोर ने लिंगानुपात को स्वास्थ्य के नजरिए से देखने की परंपरा को अव्यवहारिक बताया। कहा कि सामाजिक मान्यताएं जब तक बालिका शिशु के जन्म को महिमामंडित करने की ओर नहीं बढे़गी तब तक इस एक्ट का दुरुपयोग रोका नहीं जा सकता। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आके पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड में वर्ष 2015-16 में 1000 बालक शिशु के मुकाबले 906 बालिकाएं थी। जबकि वर्ष 2018-19 में यह अनुपात 1000/938 पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड एवं निगरानी समिति के सदस्य डॉ. साबू जॉर्ज ने कहा कि एक्ट को लागू हुए 24 साल हो गए हैं। लेकिन, आज भी इसे गंभीरता के साथ नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा समाज महिलाओं के स्थान और उनके महत्व को नहीं मानेगा तब तक स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। नेक लाडली एनजीओ की मुखिया वर्षा देशपांडे ने एक्ट की प्रमुख बातों को अधिकारियों के सामने रखा।
विज्ञापन

कार्रवाई में हरियाणा सबसे ऊपर
घटते लिंगानुपात के मामले में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई प्रगति को सबसे बेहतर बताया। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में अभी तक 89 मामलों में वाद दर्ज किए गए हैं। 22 रेडियोलॉजिस्ट का मेडिकल लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है। जबकि, उत्तराखंड में मात्र चार मामलों में कार्रवाई हुई। लेकिन, लाइसेंस का निलंबन किसी का नहीं किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed